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न तमंहो॒ न दु॑रि॒तं देवा॑सो अष्ट॒ मर्त्य॑म् । स॒जोष॑सो॒ यम॑र्य॒मा मि॒त्रो नय॑न्ति॒ वरु॑णो॒ अति॒ द्विष॑: ॥

English Transliteration

na tam aṁho na duritaṁ devāso aṣṭa martyam | sajoṣaso yam aryamā mitro nayanti varuṇo ati dviṣaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

न । तम् । अंहः॑ । न । दुः॒ऽइ॒तम् । देवा॑सः । अष्ट॑ । मर्त्य॑म् । स॒ऽजोष॑सः । यम् । अ॒र्य॒मा । मि॒त्रः । नय॑न्ति । वरु॑णः । अति॑ । द्विषः॑ ॥ १०.१२६.१

Rigveda » Mandal:10» Sukta:126» Mantra:1 | Ashtak:8» Adhyay:7» Varga:13» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:10» Mantra:1


BRAHMAMUNI

इस सूक्त में अध्यापक आदि विद्वान् सूर्य आदि रक्षक सुखसाधक जीवनयात्रा के सहायक उनके यथार्थ सेवन से होते हैं इत्यादि विषय हैं।

Word-Meaning: - (अर्यमा) अरि-शत्रुओं को नियन्त्रण में रखनेवाला सूर्य, मुख्य प्राण, परमगुरु परमात्मा (मित्रः) वायु, प्राण-श्वास, अध्यापक (वरुणः) जल, अपान, प्रश्वास, उपदेशक (सजोषसः) समान सेवन से संसक्त हुए (देवासः) देव (द्विषः-अति) द्वेष करनेवालों को लाङ्घ कर (यं नयन्ति) जिस पर अनुग्रह करते हैं, (तं मर्त्यम्) उस मनुष्य को (अंहः-न दुरितं न) न घातक पाप और न दुःख रोग (अष्ट) प्राप्त होता है ॥१॥
Connotation: - सूर्य मुख्य प्राण, परमात्मा, वायु, अध्यापक तथा जल, अपान, उपदेशक जिसकी रक्षा करते हैं अर्थात् जो मनुष्य इन्हें अनुकूल बना लेता है, उससे द्वेष करनेवाले जन द्वेष नहीं करते और न उसे पाप व रोग प्राप्त होता है ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

न अंहः, न दुरितम्

Word-Meaning: - [१] हे (देवास:) = देवो ! (तं मर्त्यम्) = इस मनुष्य को (अंहः) = कुटिलता (न अष्ट) = व्याप्त नहीं होती । (न दुरितम्) = ना ही कोई दुर्गति व्याप्त होती है। न तो वह कुटिल होता है ना ही किसी दुराचरण में फँसता है। (यम्) = जिस को अर्यमा (मित्र: वरुणः) = अर्यमा, मित्र और वरुण (सजोषसः) = समानरूप से प्रीतिवाले हुए हुए (द्विषः) = द्वेष की भावनाओं से (अतिनयन्ति) = पार ले जाते हैं । [२] (अर्यमा) = 'अरीन् यच्छति' = काम-क्रोध आदि शत्रुओं को काबू करता है। (मित्रः) = 'प्रमीते: त्रायते पाप व मृत्यु से बचाता है। (वरुणः) = 'पापान्निवारयति' पाप को हमारे से दूर करता है। 'मित्र' में 'मेद्यते स्त्रिह्यति' स्नेह की भावना भी है। तथा 'वरुण' में द्वेष निवारण की। ये तीनों ही देव हमारे जीवनों में समानरूप से प्रीतिवाले होते हैं तो हम द्वेष की भावनाओं से सदा ऊपर उठे रहते हैं । उस समय न हम कुटिलता के शिकार होते हैं और न दुराचरण के । हम '
Connotation: - भावार्थ- अर्यमा, मित्र व वरुण' की आराधना करते हुए द्वेष से ऊपर उठें, कुटिलता व दुराचरण में न पड़ें।

BRAHMAMUNI

अत्र सूक्ते अध्यापकादयो विद्वांसः सूर्यादयश्च रक्षकाः सुखसम्पादका जीवनयात्रायाः परमसहायकाः सन्ति तेषां यथार्थानुष्ठानेनेत्यादयो विषयाः सन्ति।

Word-Meaning: - (अर्यमा) अरीन् शत्रून् विरोधिनो नियच्छति वशीकरोति यः सः “अर्यमा-अरीन्नियच्छतीति” [निरु० ११।२३] आदित्यः, मुख्यप्राणः परमगुरुः परमात्मा (मित्रः) वायुः “अयं वै वायुर्मित्रो योऽयं पवते” [श० ६।५।४।१४] प्राणः-श्वासः “प्राणो वै मित्रः” [तै० सं० ५।३।४।२] अध्यापकः “मित्रावरुणौ-अध्यापकोपदेशकौ” [ऋ० ७।३३।१० दयानन्दः] (वरुणः) जलम् “आपो वै वरुणः” [काठ० १३।२] अपानः-प्रश्वासः “अपानो वरुणः” [श० १४।६।१।१२] उपदेशकः (सजोषसः) एते समानसेवनेन यथार्थानुष्ठानेन संसक्ताः (देवासः) देवा दिव्यधर्माणः (द्विषः-अति) द्वेष्टॄन् विरोधिनोऽतिक्रम्य (यं नयन्ति) यं जनमनुगच्छन्ति (तं मर्त्यम्) तं जनं (अंहः-न दुरितं न-अष्ट) घातकं कर्म पापम् “अंहः-हन्तेः” [निरु० ४।२५] न-प्राप्नोति न दुःखं रोगो वा प्राप्नोति “अशूङ्धातोर्लुङि छान्दसः प्रयोगः” ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O devas, divinities of nature, noble scholars and sages, neither sin nor suffering, nor anything vicious can touch the mortal whom Aryama, spirit of enlightened guidance, Mitra, spirit of love and friendship, and Varuna, spirit of judgement and justice, all together with love and care without relent, lead across hate, jealousy and enmity.