Word-Meaning: - [१] (अग्रे) = सब से आगे तो (भोजाः) = दानवृत्ति से औरों का पालन करनेवाले पुरुष (सुरक्षिं योनिम्) = बड़े सुगन्धिवाले घर को (जिग्युः) = जीतते हैं [सुरभि = shining, good, gistuous, wise] ये ऐसे घर को प्राप्त करते हैं जिसमें कि सब लोग स्वास्थ्य की दीप्तिवाले, उत्तम वृत्तिवाले व बुद्धिमान् होते हैं। [२] (भोजाः) = ये औरों का पालन करनेवाले पुरुष उस (वध्वं जिग्युः) = वधू को प्राप्त करते हैं (या) = जो (सुवासाः) = जो आर्यवेश [सु+वासस्] वाली होती हुई घर में सब के उत्तम निवास का कारण बनती है [सुष्ठु वासयति । [३] (भोजाः) = ये भोज पुरुष (सुरायाः) = ऐश्वर्य के (अन्तः पेयम्) = घर के अन्दर पान को (जिग्यु:) = जीतते हैं। इनके घर में ऐश्वर्य की कमी नहीं होती । परन्तु इस ऐश्वर्य को यह अन्तः पेय बनाते हैं, क्लव आदि में उसका अपव्यय नहीं करते। [४] और अन्त में (भोजाः) = ये पुरुष उनको (जिग्युः) = जीत लेते हैं, युद्ध में पराजित करनेवाले होते हैं (ये) = जो (अहूताः) = बिना युद्ध के लिए ललकारे गये हुए भी (प्रयन्ति) = धावा बोल देते हैं । अर्थात् आक्रमणात्मक युद्ध करनेवालों के ये पराजित करनेवाले होते हैं। जिस देश के व्यक्तियों में यह त्यागवृत्ति होगी वह देश कभी शत्रुओं का शिकार नहीं होता ।
Connotation: - भावार्थ- दान से घर अच्छा बनता है, देश स्वतन्त्र रहता है।