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आ नो॑ दे॒वः स॑वि॒ता सा॑विष॒द्वय॑ ऋजूय॒ते यज॑मानाय सुन्व॒ते । यथा॑ दे॒वान्प्र॑ति॒भूषे॑म पाक॒वदा स॒र्वता॑ति॒मदि॑तिं वृणीमहे ॥

English Transliteration

ā no devaḥ savitā sāviṣad vaya ṛjūyate yajamānāya sunvate | yathā devān pratibhūṣema pākavad ā sarvatātim aditiṁ vṛṇīmahe ||

Pad Path

आ । नः॒ । दे॒वः । स॒वि॒ता । सा॒वि॒ष॒त् । वयः॑ । ऋजु॒ऽय॒ते । यज॑मानाय । सु॒न्व॒ते । यथा॑ । दे॒वान् । प्र॒ति॒ऽभूषे॑म । पा॒क॒ऽवत् । आ । स॒र्वऽता॑तिम् । अदि॑तिम् । वृ॒णी॒म॒हे॒ ॥ १०.१००.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:100» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:5» Varga:16» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:9» Mantra:3


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (नः) हमारा (सविता देवः) उत्पादक परमात्मदेव (ऋजूयते) ऋजुगामी सरलप्रवृत्तिशील (सुन्वते) उपासनारस निष्पादन करनेवाले (यजमानाय) आत्मा के लिए (वयः) विज्ञान को (आसाविषत्) भलीभाँति प्राप्त कराता है (यथा देवान्) जैसे ही इन्द्रियों को (प्रतिभूषेम) संस्कृत करें (पाकवत्) पाक के समान उत्तम कर्मफलयुक्त करें (सर्वतातिम्) उस सर्वजगद्विस्तारक (अदितिम्) अविनश्वर परमात्मा को (आवृणीमहे) हम भलीभाँति वरते हैं, मानते हैं ॥३॥
Connotation: - उत्पादक परमात्मा सरल उपासक आत्मा के लिए ऐसा विज्ञान प्राप्त करता है, जिससे इन्द्रियों को संस्कृत तथा शुभफल भोगवाली बनाया जा सके, उस सर्वजगद्विस्तारक अविनाशी परमात्मा को मानना- अपनाना चाहिये ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'ऋजूयन्-यजमान- सुन्वन्

Word-Meaning: - [१] (नः) = हमारे लिए (देवः सविता) = दिव्यगुणों का पुञ्ज, प्रेरक [सू प्रेरणे] व उत्पादक [सु अभिषवे] प्रभु (वयः) = उत्कृष्ट अन्न को (आसाविषत्) = उत्पन्न करे । (ऋजूयते) = ऋजु -सरल-मार्ग से चलनेवाले, (यजमानाय) = यज्ञशील, (सुन्वते) = सोम का अपने में अभिषव [उत्पादन] करनेवाले के लिए सोमशक्ति [वीर्य-शक्ति] को अपने में सुरक्षित करनेवाले के लिए प्रभु (पाकवत्) = अत्यन्त प्रशंसनीय [praiseworthy ] (वय:) = अन्न को दें, (यथा) = जिससे (देवान्) = दिव्यगुणों को (प्रतिभूषेम) = अपने में हम सुशोभित कर पायें। [२] अन्न की सात्त्विकता वृत्ति की सात्त्विकता का कारण बनती है । सात्त्विक अन्न के सेवन से हमारे में दिव्यगुणों का विकास होता है और हम इन दिव्यगुणों से अपने जीवन को सुशोभित कर पाते हैं । इस सात्त्विक अन्न के सेवन से हम (सर्वतातिम्) - सब दिव्यगुणों का विस्तार करनेवाले (अदितिम्) = स्वास्थ्य को आवृणीमहे वरते हैं । स्वस्थ बनकर सभी उत्तम चीजों के प्राप्त करने के योग्य होते हैं।
Connotation: - भावार्थ - ऋजुमार्ग से चलते हुए, यज्ञशील बनकर, सोम के सम्पादन के द्वारा हम उत्कृष्ट अन्न का सेवन करते हुए अपने जीवन को दिव्यगुणों से अलंकृत करते हैं।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (नः सविता देवः) अस्माकमुत्पादको देवः परमात्मा (ऋजूयते सुन्वते यजमानाय) ऋजुगामिने-उपासनारसनिष्पादयित्रे-आत्मने, “आत्मा यजमानः” [कौ० १७।७] (वयः-आ साविषत्) विज्ञानम् “वयः-विज्ञानम्” [ऋ० १।७१।७ दयानन्दः] समन्तात् प्रापयति (यथा देवान् प्रतिभूषेम) यथा हीन्द्रियाणि प्रतिभूषयेम संस्कृतानि कुर्याम (पाकवत्) पाकमिव सुपक्वफलयुक्तानि कुर्याम (सर्वतातिम्-अतिथिम्-आवृणीमहे) अतस्तं सर्वजगद्विस्तारकम-विनश्वरं परमात्मनि समन्ताद् वृणुयाम ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May the self-refulgent generous Savita, divine inspirer and light giver, bless the simple, natural and creative yajamana with good health, long life and wealth of maturity and discipline of performance, so that we may serve and exalt the devas with homage and piety of mind and soul. With total submission and faith, we love and adore the universal mother Infinity.