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तमु॑ त्वा वृत्र॒हन्त॑मं॒ यो दस्यूँ॑रवधूनु॒षे। द्यु॒म्नैर॒भि प्र णो॑नुमः ॥

English Transliteration

tam u tvā vṛtrahantamaṁ yo dasyūm̐r avadhūnuṣe | dyumnair abhi pra ṇonumaḥ ||

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Pad Path

तम्। ऊँ॒ इति॑। त्वा॒। वृ॒त्र॒हन्ऽत॑मम्। यः। दस्यू॑न्। अ॒व॒ऽधू॒नु॒षे। द्यु॒म्नैः। अ॒भि। प्र। नो॒नु॒मः॒ ॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:78» Mantra:4 | Ashtak:1» Adhyay:5» Varga:26» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:13» Mantra:4


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वह विद्वान् कैसा हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

Word-Meaning: - हे विद्वन् (यः) जो (त्वम्) तू (दस्यून्) महादुष्ट डाकुओं को (अवधूनुषे) कँपा के नष्ट करता है (तम्) उसी (वृत्रहन्तमम्) मेघ वर्षानेवाले सूर्य के समान (त्वा) तेरी (द्युम्नैः) कीर्तिकारी शस्त्रों से हम लोग (अभि) सम्मुख होके (प्रणोनुमः) सब प्रकार स्तुति करें ॥ ४ ॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! तुम लोग जिसका कोई शत्रु न हो ऐसा विद्वान् सभाध्यक्ष जो कि दुष्ट शत्रुओं को परास्त कर सके, उसकी सदैव सेवा करो ॥ ४ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्ञान

Word-Meaning: - १. हे प्रभो ! (तं त्वा उ) = उन आपको ही जोकि (वृत्रहन्तमम्) = ज्ञान की आवरणभूत वासना को पूर्णरूपेण नष्ट करनेवाले हैं, (यः) = जो (दस्यून्) = विनाशक वृत्तियों को (अवधूनुषे) = कम्पित करके दूर करनेवाले हैं, उन आपको (द्युम्नैः) = ज्ञानज्योति के हेतु से (अभिप्रणोनुमः) = दिन के आरम्भ व अन्त में, दोनों समय खूब ही प्रणाम करते हैं । २. महादेव की तृतीय नेत्र [ज्ञाननेत्र] की ज्योति से काम का दहन हो जाता है । प्रभुकृपा से हमें भी वह ज्ञानज्योति प्राप्त हो जिससे हमारी सब वासनाएँ भस्मसात् हो जाएँ ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभुकृपा से हमें वह ज्ञानज्योति प्राप्त हो जो वासनाओं को दग्ध कर देती है ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनः स कीदृश इत्युपदिश्यते ॥

Anvay:

हे विद्वन् ! यस्त्वं दस्यूँरवधूनुषे तं वृत्रहन्तमं त्वामु द्युम्नैः सह वर्त्तमाना वयमभिप्रणोनुमः ॥ ४ ॥

Word-Meaning: - (तम्) उक्तम् (उ) वितर्के (त्वा) त्वाम् (वृत्रहन्तमम्) अतिशयेन वृत्रस्य हन्तारम् (यः) विद्वान् (दस्यून्) महादुष्टान् (अवधूनुषे) अतिकम्पयति (द्युम्नैः) यशसा प्रकाशमानैः शस्त्रास्त्रैः (अभि) आभिमुख्ये (प्र) प्रकृष्टे (नोनुमः) भृशं स्तुमः ॥ ४ ॥
Connotation: - हे मनुष्या ! यूयं योऽजातशत्रुः सभाध्यक्षः दुष्टाचारान् शत्रून् पराजयते तं सदा सेवध्वम् ॥ ४ ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, breaker of the cloud and dispeller of darkness, who shake the evil and wicked to destruction, we celebrate you in homage with all the power and valour at our command.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Anvay:

We praise thee repeatedly who art the destroyer of the wicked ignoble persons and who puttests them to flight. We possessing shining or glittering weapons, praise thee repeatedly.

Word-Meaning: - (दस्यून) महादुष्टान् = Very wicked persons. (घुम्नै:) यशसा प्रकाशमानैः शस्त्रास्त्रैः = With shining or glittering arms, and weapons.
Connotation: - O men, you should constantly serve the President of the Assembly who is without enemies (most popular) and who overcomes all wicked persons.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो ! ज्याचा कोणी शत्रू नसेल, असा विद्वान सभाध्यक्ष, जो दुष्ट शत्रूंना पराजित करू शकेल, त्याची सेवा करा. ॥ ४ ॥