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त्रि॒ष॒ध॒स्थे ब॒र्हिषि॑ विश्ववेदसा॒ मध्वा॑ य॒ज्ञं मि॑मिक्षतम् । कण्वा॑सो वां सु॒तसो॑मा अ॒भिद्य॑वो यु॒वां ह॑वन्ते अश्विना ॥

English Transliteration

triṣadhasthe barhiṣi viśvavedasā madhvā yajñam mimikṣatam | kaṇvāso vāṁ sutasomā abhidyavo yuvāṁ havante aśvinā ||

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Pad Path

त्रि॒ष्सध॒स्थे । ब॒र्हिषि॑ । वि॒श्व॒वे॒द॒सा॒ । मध्वा॑ । य॒ज्ञम् । मि॒मि॒क्ष॒त॒म् । कण्वा॑सः । वाम् । सु॒तसो॑माः । अ॒भिद्य॑वः । यु॒वाम् । ह॒व॒न्ते॒ । अ॒श्वि॒ना॒॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:47» Mantra:4 | Ashtak:1» Adhyay:4» Varga:1» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:9» Mantra:4


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वे कैसे हैं इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - हे (विश्ववेदसा) अखिल धनों के प्राप्त करनेवाले (अश्विना) क्षत्रियों के धर्म में स्थित के सदृश सभा सेनाओं के रक्षक ! आप जैसे (अभिद्यवः) सब प्रकार से विद्याओं के प्रकाशक और विद्युदादि पदार्थों के साधक (सुतसोमाः) उत्पन्न पदार्थों के ग्राहक (कण्वासः) मेधावी विद्वान् लोग (त्रिसधस्थे) जिसमें तीनों भूमि जल पवन स्थिति के लिये हों उस (बर्हिषि) अन्तरिक्ष में (मध्वा) मधुर रस से (वाम्) आप और (यज्ञम्) शिल्प कर्म को (हवन्ते) ग्रहण करते हैं वैसे (मिमिक्षतम्) सिद्ध करने की इच्छा करो ॥४॥
Connotation: - जैसे मनुष्य लोग विद्वानों से विद्या सीख यान रच और उसमें जल आदि युक्त करके शीघ्र जाने आने के वास्ते समर्थ होते हैं वैसे अन्य उपाय से नहीं इस लिये उसमें परिश्रम अवश्य करें ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

कण्व - सुतसोम - अभिद्यु

Word-Meaning: - १. (विश्ववेदसा) = हे सम्पूर्ण धनोंवाले (अश्विना) = अश्विनी देवो - प्राणापानो ! (त्रिषधस्थे) = जिसमें 'प्रकृति, जीव व परमात्मा' - तीनों साथ - साथ हैं, अर्थात् जो तीनों का ध्यान करता है, उस (बर्हिषि) = वासनाशून्य हृदय के होने पर (मध्वा) = माधुर्य से (यज्ञम्) = जीवन - यज्ञ को (मिमिक्षतम्) = आप सिक्त कर दीजिए, अर्थात् प्राणसाधना से हमारा हृदय वासनाशून्य हो [बर्हिषि] । उसमें प्रकृति, जीव व परमात्मा तीनों का विचार हो, धर्मार्थ - काम - तीनों की ओर यह समरूप से प्रवृत्त हो [त्रिषधस्थे], इस प्रकार हमारा जीवन माधुर्यमय हो [मध्य] । २. (कण्वासः) = कण - कण करके ज्ञान का संचय करनेवाले मेधावी लोग, (सुतसोमाः) = सोम - शक्ति का उत्पादन करनेवाले (अभिद्यवः) = प्रकाश की ओर चलनेवाले लोग (वाम्) = आपको (युवाम्) = आपको ही (हवन्ते) = पुकारते हैं, अर्थात् प्राणसाधना से ही मनुष्य 'कण्व, सुतसोम व अभिद्यु' बन पाता है ।
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधना होने पर हमारे जीवन में धर्मार्थ - काम तीनों साथ - साथ रहते हैं । हम बुद्धिमान्, शक्तिसम्पन्न व प्रकाशमय जीवनवाले होते हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(त्रिषधस्थे) त्रीणि भुजलपवनाख्यानि स्थित्यर्थानि स्थानानि यस्मिँस्तस्मिन् (बर्हिषि) अन्तरिक्षे (विश्ववेदसा) विश्वान्यखिलान्यन्नानि धनानि वा ययोस्तौ (मध्वा) मधुरेण रसेन। जसादिषु छन्दसि वा वचनाद् नादेशो न। (यज्ञम्) शिल्पाख्यम् (मिमिक्षतम्) मेढुं सेक्तुमिच्छतम् (कण्वासः) मेधाविनः (वाम्) युवाम् (सुतसोमाः) सुता निष्पादिताः सोमाः पदार्थसारा यैस्ते (अभिद्यवः) अभितः सर्वतो द्यवो दीप्ता विद्या विद्युदादयः पदार्थाः साधिता यैस्ते। अत्र द्युतधातोर्बाहुलकादौणादिको डुः प्रत्ययः। (युवाम्) यौ (हवन्ते) गृह्णन्ति (अश्विना) क्षत्रधर्मव्यापिनौ ॥४॥

Anvay:

पुनस्तौ कीदृशावित्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - हे विश्ववेदसाऽश्विनेव वर्त्तमानौ सभासेनेशौ ! युवां यथाऽभिद्यवः सुतसोमाः कण्वासो विद्वांसस्त्रिषधस्थे बर्हिषि मध्वा मधुरेण रसेन वां यज्ञं च हवन्ते तथा मिमिक्षतम् ॥४॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालंकारः। यथा मनुष्या विद्वद्भ्यो विद्यां गृहीत्वा यानानि रचयित्वा तत्र जलादिकं संयोज्य सद्यो गमनाय शक्नुवन्ति तथा नेतरेणोपायेन ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, masters of universal knowledge and creators of the world’s wealth, in the three-stage yajnic house of space—on the earth, across the skies and over the heavens—try to conduct and enrich the yajna with honeyed fragrances. Brilliant sages who have distilled the soma for you call you up to the heavens.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

How are the Ashvins is taught further in the fourth Mantra.

Anvay:

O President of the Assembly and commander of the Army who pervade (discharge) the duties of the Kshatriyas. as Wise men who are possessors of abundant food and wealth or are knowers of all objects, who are shining on all sides with knowledge and have accomplished many works with the proper use of electricity who have expressed the essence of herbs and other articles invite you and prepare sweet juice for your drink, performing Yajna in the form of industrial work in the atmosphere which is associated with the earth, water and air, so you should also sprinkle the water of happiness and joy on all.

Word-Meaning: - (अभिद्यव:) अभितः सर्वतो द्यवः दीप्ता विद्या विदयुदादयः पदार्थाः साधिता यैस्ते = Those who shine on all sides with knowledge and have accomplished many works with the proper use of electricity. (अश्विना) क्षत्रधर्मव्यापिनौ = Pervading in or discharging the duties of the Kshatriyas (अशूङ्-व्याप्तौ Tr.)
Connotation: - As men can go everywhere after acquiring knowledge from the learned people, manufacturing various vehicles and combining water in proper proportion, they cannot do so otherwise.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जशी माणसे विद्वानांकडून विद्या शिकून यान तयार करून त्यात जल इत्यादी युक्त करून तात्काळ जाण्या-येण्यासाठी समर्थ होतात तसे अन्य उपायाने होत नाहीत. त्यासाठी त्यातच परिश्रम अवश्य करावे. ॥ ४ ॥