Go To Mantra
Viewed 427 times

आ नो॑ ना॒वा म॑ती॒नां या॒तं पा॒राय॒ गन्त॑वे । यु॒ञ्जाथा॑मश्विना॒ रथ॑म् ॥

English Transliteration

ā no nāvā matīnāṁ yātam pārāya gantave | yuñjāthām aśvinā ratham ||

Mantra Audio
Pad Path

आ । नः॒ । ना॒वा । म॒ती॒नाम् । या॒तम् । पा॒राय॑ । गन्त॑वे । यु॒ञ्जाथा॑म् । अ॒श्वि॒ना॒ । रथ॑म्॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:46» Mantra:7 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:34» Mantra:2 | Mandal:1» Anuvak:9» Mantra:7


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वे क्या करें इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - हे (अश्विना) व्यवहार करनेवाले कारीगरो ! आप (मतीनाम्) मनुष्यों की (नावा) नौका से (पाराय) पार (गन्तवे) जाने के लिये (नः) हमारे लिये (रथम्) विमान आदि यान समूहों को (युंजाथाम्) युक्त कर चलाइये ॥७॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि रथ से स्थल अर्थात् सूखे में नाव से जल में विमान से आकाश में जाया आया करें ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

नाव या रथ

Word-Meaning: - १. हे (अश्विना) - प्राणापानो ! आप हमारी बुद्धियों को सूक्ष्म तो बनाते ही हो, आप (मतीनां नावा) - इन बुद्धियों की नौका के साथ (नः) - हमें (आयातम्) - प्राप्त होओ । आपकी कृपा से बुद्धि हमारे लिए नौका के रूप में हो जोकि (पाराय गन्तवे) - इस भवसागर से पार जाने के लिए हमारा साधन बने । संसार समुद्र है तो प्रभु ने यह बुद्धि हमें नाव के रूप में दी है । प्राणसाधना से यह नाव ठीक - ठाक बनी रहेगी, तो हम भवसागर से अवश्य ही पार उतर पाएँगे ।  २. हे प्राणापानो ! (रथं युञ्जाथाम्) - शरीररूप रथ को इन्द्रियाश्वों से युक्त करो । प्राणसाधना से इस शरीररूप रथ में उत्तम इन्द्रियरूप अश्वों का संयोजन होता है और हम इस जीवनयात्रा को पूर्ण कर पाते हैं । जीवनयात्रा की पूर्णता के लिए क्रियाशीलता आवश्यक है और प्राणसाधना के बिना शक्ति व क्रियाशीलता सम्भव नहीं होती । एवं ये अश्विनौ इस शरीर को भवार्णव के तैरने के लिए नौका का रूप देते हैं तो इस संसार - कान्तार को पार करने के लिए रथ का ।   
Connotation: - भावार्थ - हमारा यह शरीर एक सुन्दर नाव के समान हो जो हमें भवसागर से पार उतारनेवाली हो तथा यह शरीर वह रथ हो जो हमारी जीवन - यात्रा की पूर्ति में सहायक हो ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(आ) समन्तात् (नः) अस्मान् (नावा) नौकादिना (मतीनाम्) मनुष्याणाम् (यातम्) प्राप्नुतम् (पाराय) परतटम् (गन्तवे) गन्तुम्। अत्र# गत्यर्थकर्मणि० इति *द्वितीयार्थे चतुर्थी। (युंजाथाम्) (अश्विना) व्यवहारव्यापिनौ। अत्र सुपांसुलुग् इत्याकारादेशः। (रथम्) रमणीयं विमानादिकं यानसमूहम् ॥७॥ #[अ० २।३।१२।] *[कर्मणीत्यर्थः। सं०]

Anvay:

पुनस्तौ किं कुर्य्यातामित्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - हे अश्विना ! युवां मतीनां नावा पाराय गन्तवे नोऽस्मानायातं रथं च युञ्जाथाम् ॥७॥
Connotation: - मनुष्यै रथेन स्थले नौकया समुद्रे विमानेनाऽकाशे गमनाऽगमने कार्य्ये ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, harbingers of light, knowledge and power, design and prepare and bring us the chariot for the people to cross over land and sea and sky and reach their destination.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What else should they ( Ashvinau ) do is taught in the seventh Mantra.

Anvay:

O expert learned artisans, come by a ship prepared by wise men to take us across the ocean. Harness your chariot to go everywhere.

Word-Meaning: - ( अश्विना ) व्यवहारव्यापिनौ । अत्र सुपांसुलुक् (अष्टा० ) इत्याकारादेशः अशूङ्-व्याप्तौ = Well-versed in worldly dealings, expert artisans. ( रथम् ) रमणीयं विमानादिकं यानसमूहम् = Beautiful vehicles like aero plane etc.
Connotation: - Men should come and go by a Chariot on land, by a boat or ship to the river or sea and by aero plane on the sky.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांनी रथाने जमिनीवर, नौकेने समुद्रातून व विमानाने आकाशातून गमनागमन करावे. ॥ ७ ॥