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अ॒द्या दू॒तं वृ॑णीमहे॒ वसु॑म॒ग्निं पु॑रुप्रि॒यम् । धू॒मके॑तुं॒ भाऋ॑जीकं॒ व्यु॑ष्टिषु य॒ज्ञाना॑मध्वर॒श्रिय॑म् ॥

English Transliteration

adyā dūtaṁ vṛṇīmahe vasum agnim purupriyam | dhūmaketum bhāṛjīkaṁ vyuṣṭiṣu yajñānām adhvaraśriyam ||

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Pad Path

अ॒द्य । दू॒तम् । वृ॒णी॒म॒हे॒ । वसु॑म् । अ॒ग्निम् । पु॒रु॒प्रि॒यम् । धू॒मके॑तुम् । भाःऋ॑जीकम् । विउ॑ष्टिषु । य॒ज्ञाना॑म् । अ॒ध्व॒र॒श्रिय॑म्॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:44» Mantra:3 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:28» Mantra:3 | Mandal:1» Anuvak:9» Mantra:3


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर कैसे मनुष्य को स्वीकार करे, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - हम लोग (अद्य) आज मनुष्य जन्म वा विद्या के प्राप्ति समय को प्राप्त होकर (व्युष्टिषु) अनेक प्रकार की कामनाओं में (भाऋजीकम्) कामनाओं के प्रकाश (यज्ञानाम्) अग्निहोत्र आदि अश्वमेघ पर्यन्त वा योग उपासना ज्ञान शिल्पविद्यारूप यज्ञों के मध्य (अध्वरश्रियम्) अहिंसनीय यज्ञों की श्री शोभारूप (धूमकेतुम्) जिसका धूम ही ध्वजा है (वसुम्) सब विद्याओं का घर वा बहुत धन की प्राप्ति का हेतु (पुरुप्रियम्) बहुतों को प्रिय (दूतम्) पदार्थों को दूर पहुंचानेवाले (अग्निम्) भौतिक अग्नि के सदृश विद्वान् दूत को (वृणीमहे) अंगीकार करें ॥३॥
Connotation: - मनुष्यों को उचित है कि विद्या वा राज्य की प्राप्ति के लिये सब विद्याओं के कथन करने वा सब बातों का उत्तर देनेवाले विद्वान् को दूत करें और बहुत गुणों के योग से बहुत कार्य्यों को प्राप्त करानेवाली बिजुली को स्वीकार करके सब कार्य्यों को सिद्ध करें ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धूमकेतु [भाऋजीक] अध्वरश्रीः

Word-Meaning: - १. (अद्य) - आज हम उस (दूतम्) - ज्ञान का सन्देश प्राप्त करानेवाले प्रभु को (वृणीमहे) - वरते हैं जो  २. वरण किये जाने पर (वसुम्) - हमारे निवास को उत्तम बनानेवाले हैं, (अग्निम्) - हमें आगे ले - चलनेवाले हैं, (पुरुप्रियम्) - पालक व पूरक हैं और उत्तमोत्तम जीवन में उन्नति की साधनभूत वस्तुओं को प्राप्त कराके प्रीणित करनेवाले हैं, (धूमकेतुम्) - वासनाओं के कम्पित करनेवाले प्रज्ञान को प्राप्त करानेवाले हैं और (भाऋजीकम्) - [प्रार्जयितारम्] दीप्ति का अर्जन करानेवाले हैं ।  ३. उस प्रभु का हम वरण करते हैं जो (व्युष्टिषु) - उषः कालों में (यज्ञानाम्) - यज्ञों की (अध्वरश्रियम्) - हिंसारहित श्री - [शोभा] - वाले हैं, अर्थात् प्रभु की कृपा से ही हम प्रत्येक उषः काल में यज्ञ की वृत्तिवाले होते हैं और प्रभुकृपा से ही यज्ञ पूर्ण हुआ करते हैं । प्रभु ही उन यज्ञों को वह शोभा प्राप्त कराते हैं जो नष्ट नहीं होती ।   
Connotation: - भावार्थ - प्रभु ज्ञान देकर हमारे जीवन को उत्तम बनाते हैं, प्रभुकृपा से ही हमारे जीवन यज्ञों से विभूषित होते हैं ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(अद्य) अस्मिन् दिने। निपातस्य च इति दीर्घः। (दूतम्) यो दुनोति पदार्थान् देशांतरं प्रापयति तम् (वृणीमहे) स्वीकुर्वीमहि (वसुम्) सकलविद्यानिवासम् (अग्निम्) पावकमिव विद्वांसम् (पुरुप्रियम्) यः पुरूणां बहूनां प्रियस्तम् (धूमकेतुम्) धूमकेतुर्ध्वजो यस्य तम् (भाऋजीकम्) भाति प्रकाशयति सा भा भा कान्तिर्वा तां योऽर्जयते तम् (व्युष्टिषु) विविधा उष्टयः कामनाश्च तासु (यज्ञानाम्) अग्निहोत्राद्यश्वमेधान्तानां योगज्ञानशिल्पोपासनाज्ञानानां वा मध्ये (अध्वरश्रियम्) याऽध्वराणामहिंसनीयानां यज्ञानां श्रीः शोभा ताम् ॥३॥

Anvay:

पुनस्तं कथंभूतं स्वीकुर्य्युरित्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - वयमद्य मनुष्यजन्मविद्याप्राप्तिसमयं प्राप्याऽस्मिन् दिने व्युष्टिषु भाऋजीकं यज्ञानां मध्येऽध्वरश्रियं धूमकेतुं वसुं पुरुप्रियं दूतमग्निमिव वर्त्तमानं विद्वांसं दूतं वृणीमहे ॥३॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालंकारः। मनुष्यैर्विद्याराज्यसुखप्राप्त्यर्थमनूचानं विद्वांसं दूतं कृत्वा बहुगुणयोगेन बहुकार्य्यप्रापिकां विद्युतं स्वीकृत्य सर्वाणि कार्य्याणि संसाधनीयानि ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Today we choose to invoke, invite and light up Agni, lord of light and life and knowledge, leader of the dynamics of existence, homely sustainer of all and giver of wealth, darling of everybody, moving with the flag of smoke in dazzling flames of light, and giving us brilliant success and glory in the holy yajnas of our heart’s desire.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Anvay:

We select to-day (having acquired human life and at the time of gaining knowledge) as messenger a good popular learned person, who shines like fire in assemblies and on the occasion of the fulfilment of noble desires; who is also like the fire among the non-violent Yajnas from Agnihotra to Ashwa Medha or consisting of Yoga, Shilpa (Industries) Upasana (communion with God) and knowledge, bearing the glory of the Yajnas of inviolable various kinds and fire-bannered spreader of the light.

Word-Meaning: - (अग्निम् ) पावकमिव विद्वांसम् = A learned person who is purifier like the fire. (भा ऋऋजीकम् ) भाति प्रकाशयति सा भा सभा कान्तिर्वा तां योऽर्जयते तम् = Illustrious as an orator in the assemblies. ( यज्ञानाम् ) अग्निहोत्राद्यश्वमेधान्तानां योगज्ञानशिल्पोपासनाज्ञानानां वा मध्ये = Of the Yajnas (non-violent sacrifices ) consisting of Agnihotra to Ashvamedha or Yoga, industries, communion with God and knowledge.
Connotation: - Men should accomplish all works having appointed a learned person well-versed in the Vedic lore as a messenger or ambassador, for the attainment of knowledge, kingdom and happiness. They should also accept the utility of electricity which accomplishes many works.
Footnote: In the Vedic terminology, Yajna is a very comprehensive term which is used for all good deeds and philanthropic acts. This Vedic idea has been corroborated in the Bhagavad Gita in the fourth chap. द्रव्ययज्ञास्तपो यज्ञाः, योगयज्ञास्तथा परे । स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्च यतयः संशितव्रताः ॥२८ एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे । कर्मजान् विद्धि तान् सर्वान्, एवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे ॥३२ (गीता ४) Here Yoga, tapa ( austerity) Svadhyaya (study of the Vedas) knowledge etc. have been enumerated among the Yajnas.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांनी विद्या व राज्यसुखाच्या प्राप्तीसाठी सर्व विद्या शिकविणाऱ्या बहुगुणी विद्वानाला दूत नेमावे. अनेक गुण असलेल्या अनेक कार्य प्राप्त करविणाऱ्या विद्युतचा अंगीकार करून सर्व कार्य सिद्ध करावे. ॥ ३ ॥