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यत्ते॒ गात्रा॑द॒ग्निना॑ प॒च्यमा॑नाद॒भि शूलं॒ निह॑तस्याव॒धाव॑ति। मा तद्भूम्या॒मा श्रि॑ष॒न्मा तृणे॑षु दे॒वेभ्य॒स्तदु॒शद्भ्यो॑ रा॒तम॑स्तु ॥

English Transliteration

yat te gātrād agninā pacyamānād abhi śūlaṁ nihatasyāvadhāvati | mā tad bhūmyām ā śriṣan mā tṛṇeṣu devebhyas tad uśadbhyo rātam astu ||

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Pad Path

यत्। ते॒। गात्रा॑त्। अ॒ग्निना॑। प॒च्यमा॑नात्। अ॒भि। शूल॑म्। निऽह॑तस्य। अ॒व॒ऽधाव॑ति। मा। तत्। भूम्या॑म्। आ। श्रि॒ष॒त्। मा। तृणे॑षु। दे॒वेभ्यः॑। तत्। उ॒शत्ऽभ्यः॑। रा॒तम्। अ॒स्तु॒ ॥ १.१६२.११

Rigveda » Mandal:1» Sukta:162» Mantra:11 | Ashtak:2» Adhyay:3» Varga:9» Mantra:1 | Mandal:1» Anuvak:22» Mantra:11


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

Word-Meaning: - हे विद्वान् ! (निहतस्य) निरन्तर चलायमान हुए (ते) तुम्हारे (अग्निना) क्रोधाग्नि से (पच्यमानात्) तपाये हुए (गात्रात्) हाथ से (यत्) जो शस्त्र (अभि, शूलम्) लखके शूल के समान पीड़ाकारक शत्रु के सम्मुख (अव, धावति) चलाया जाता है (तत्) वह (भूम्याम्) भूमि में (मा, आ, श्रिषत्) न गिरे वा लगे और वह (तृणेषु) घासादि में (मा) मत आश्रित हो किन्तु (उशद्भ्यः) आपके पदार्थों की चाहना करनेवाले (देवेभ्यः) दिव्य गुणी शत्रु के लिये (रातम्) दिया (अस्तु) हो ॥ ११ ॥
Connotation: - बलिष्ठ विद्वान् मनुष्यो को चाहिये कि संग्राम में शस्त्र चलाने के समय विचारपूर्वक ही शस्त्र चलावें, जिससे क्रोधपूर्वक चला शस्त्र भूमि आदि में न पड़े किन्तु शत्रुओं को ही मारनेवाला हो ॥ ११ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वीर्यरक्षण से रोग निवारण व दिव्यगुणों का विकास

Word-Meaning: - १. गतमन्त्र के अनुसार जब सात्त्विक व ठीक परिपक्व भोजन खाया जाता है तब (अग्निना पच्यमानात्) = शरीर में वैश्वानर अग्नि से पकाये जाते हुए भोजन से उत्पन्न रुधिरादि धातुओं में से (शूलम् अभि) = रोगों का लक्ष्य करके, अर्थात् रोगों को दूर करने के उद्देश्य से निहतस्य निश्चय से प्राप्त कराये गये इस वीर्य का [इन = गतौ, गतिः = प्राप्तिः] यत्-जो अंश ते गात्रात् तेरे शरीर से अवधावति- दूर जाता है, तत्- वह भूम्याम् - बीज- वपन की आधारभूत स्त्री में मा= मत आश्रिषत् = आलिंगन करे, तृणेषु मातृणतुल्य, तुच्छ विषय- भोगों में तो वह न ही व्ययित (खर्च) हो । एक या अधिक-से-अधिक तीन सन्तानों के बाद यह सन्तानोत्पत्ति में भी व्ययित न हो, भोगविलास में उसके व्यय का तो प्रश्न ही नहीं पैदा होता। भोगविलास में इसका अपव्यय मनुष्य की सर्वमहान् मूर्खता है । तत् वह - अधिक सन्तानोत्पत्ति व भोगविलास में व्ययित न हुआ-हुआ वीर्य उशद्भ्यः = ( उश् = to shine) चमकते हुए देवेभ्यः - दिव्यगुणों के लिए रातम् - दिया हुआ अस्तु हो । यह सुरक्षित वीर्य शरीर में रोगों को उत्पन्न नहीं होने देता और मन में दिव्यगुणों की उत्पत्ति का कारण बनता है।
Connotation: - भावार्थ - भोजन से उत्पन्न वीर्य का अधिक सन्तानोत्पत्ति या विलास में व्यय करना मूर्खता है। इसे सुरक्षित रखने पर शरीर रोगाक्रान्त नहीं होते और हमारे मनों में दिव्यगुणों का विकास होता है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ।

Anvay:

हे विद्वन्निहतस्य ते तवाग्निना पच्यमानाद्गात्राद्यदभिशूलमवधावति तद्भूम्यां माऽऽश्रिषत्तत्तृणेषु माऽऽश्लिष्येत्किन्तूशद्भ्यो देवेभ्यो रातं स्याद्दत्तमस्तु ॥ ११ ॥

Word-Meaning: - (यत्) शस्त्रम् (ते) तव (गात्रात्) हस्तात् (अग्निना) क्रोधरूपेण (पच्यमानात्) (अभि) अभिलक्ष्य (शूलम्) शूलमिव पीडाकरं शत्रुम् (निहतस्य) नितरां चलितस्य (अवधावति) निपतति (मा) (तत्) (भूम्याम्) (आ) (श्रिषत्) श्लिष्येत्। अत्राडभावो वर्णव्यत्ययेन लस्य स्थाने रेफादेशश्च। (मा) (तृणेषु) तृणादिषु (देवेभ्यः) दिव्येभ्यः शत्रुभ्यः (तत्) (उशद्भ्यः) त्वत्पदार्थान् कामयमानेभ्यः (रातम्) दत्तम् (अस्तु) ॥ ११ ॥
Connotation: - विद्वद्भिर्बलिष्ठैः संग्रामे शस्त्रचालनावसरे विचारेणैव शस्त्रं प्रक्षेपणीयं येन क्रोधान्निर्गतं शस्त्रं भूभ्यादौ न निपतेत्किन्तु शत्रुष्वेव कृतकारि स्यादिति ॥ ११ ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O nation on the march on the highway of progress, if from your personality-body subjected to the fire of discipline and self sacrifice, a cry of pain escape your lips or a tear flow down from the eye, let it not soil the holy ground of the motherland, nor let it be lost in the straw, but let it be a precious gift for the ambitious creators and leaders of vision to turn it into a clarion call or a beautiful pearl of divine grace.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The duties of a learned person are defined.

Anvay:

O learned hero ! whatever weapon is used by your arms burnt with anger, when you are much perturbed,. let it not waste on earth of grass, but let it directly go to and attack your enemies. who desire to conquer you.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - It is the duty of the mighty warriors to use weapons thoughtfully at the time of battles, so that the arms may not fall on earth and go waste when used with anger, but may directly hit the foes.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - बलवान विद्वान माणसांनी लढाईत शस्त्र चालविताना त्यांनी विचारपूर्वकच शस्त्र चालवावे. ज्यामुळे क्रोधाने चालविलेले शस्त्र भूमीवर पडता कामा नये, तर शत्रूंनाच मारणारे असावे. ॥ ११ ॥