Go To Mantra
Viewed 93 times

अप॒ त्ये ता॒यवो॑ यथा॒ नक्ष॑त्रा यन्त्य॒क्तुभिः॑। सूरा॑य वि॒श्वच॑क्षसे ॥

Mantra Audio
Pad Path

अप । त्ये । तायव: । यथा । नक्षत्रा । यन्ति । अक्तुऽभि: ॥ सूराय । विश्वऽचक्षसे ॥४७.१४॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:47» Paryayah:0» Mantra:14


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

१३-२१। परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

Word-Meaning: - (विश्वचक्षसे) सबके दिखानेवाले (सूराय) सूर्य के लिये (अक्तुभिः) रात्रियों के साथ (नक्षत्रा) तारा गण (अप यन्ति) भाग जाते हैं, (यथा) जैसे (त्ये) वे (तायवः) चोर [भाग जाते हैं] ॥१४॥
Connotation: - सूर्य के प्रकाश से रात्रि का अन्धकार मिट जाता है, मन्द चमकनेवाले नक्षत्र छिप जाते हैं, और चोर लोग भाग जाते हैं, वैसे ही वेदविज्ञान फैलने से अधर्म का नाश और धर्म की वृद्धि होती है ॥१४॥
Footnote: १३-२१−एते मन्त्रा व्याख्याताः-अ० १३।२।१६-२४ ॥