राजनीति से मनुष्य प्रतापी और तेजस्वी होवे।
Word-Meaning: - (अग्ने) हे तेजस्वी राजन् ! [(अति) अत्यन्त (निहः) शत्रुनाशक शूर होकर। अथवा] (निहः) नीच गतिवालों को (अति=अतीत्व) लाँघकर, (सृधः) हिंसकों को (अति) लाँघकर, (अचित्तीः) पापबुद्धि प्रजाओं को (अति) लाँघकर और (द्विषः) द्वेष करनेवालों का (अति) तिरस्कार करके, (त्वम्) तू (हि) ही (विश्वा=विश्वानि) सब (दुरिता=०–तानि) संकटों को (तर) पारकर, (अथ) और (अस्मभ्यम्) हमें (सहवीरम्) वीर पुरुषों के सहित (रयिम्) धन (दाः) दे ॥५॥
Connotation: - राजा सावधानी से प्रजा के सब क्लेशों को हरे और ऐसा प्रयत्न करे कि प्रजा के सब पुरुष उत्साही, शूरवीर और धनाढ्य हों ॥५॥ २–इस मन्त्र का पाठ यजुर्वेद २७।६। में ऐसा है। अति॒ निहो॒ अति॒स्रिधोऽत्यचि॑त्ति॒मत्यरा॑तिमग्ने। विश्वा॒ ह्य॑ग्ने॒ दुरि॒ता सह॒स्वाथा॒स्मभ्य॑ स॒ह वी॑रा र॒यिं दाः ॥१॥ (अग्ने) हे तेजस्विन् राजन् ! (अति निहः) अत्यन्त शूर होकर (स्रिधः) दुष्टों को (अति) हटाकर, (अचित्तिम्) अज्ञान को (अति) हटाकर, (अरातिम्) कंजूसपन को (अति) हटाकर (विश्वा दुरितानि) सब विघ्नों को (सहस्व) दबा दे, (अथ) और (अस्मभ्यम्) हमें (सहवीराम्) वीरों से युक्त सेना और (रयिम्) धन (दाः) दे ॥ १–(सृधः) के स्थान पर सायणभाष्य में (स्रधः) पद है ॥