Reads 45 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।
Word-Meaning: - (सा) वह (आदीयमाना) छीनी जाती हुई (ब्रह्मगवी) वेदवाणी (ब्रह्मज्यम्) ब्रह्मचारियों के हानिकारक, (देवपीयुम्) विद्वानों के सतानेवाले पुरुष को (मृत्योः) मृत्यु की (पड्वीशे) बेड़ी में (आ द्यति) बाँध देती है ॥१५॥
Connotation: - आप्त वैदिक विद्वानों को रोकनेवाला पुरुष मूर्खता के कारण महा विपत्तियों में पड़ता है ॥१५॥
Footnote: १५−(सा) पूर्वोक्ता (ब्रह्मज्यम्) अ० ५।१९।७। कविधौ सर्वत्र प्रसारणिभ्यो डः। वा० पा० ३।२।३। ब्रह्म+ज्या वयोहानौ−ड। ब्रह्मचारिणां हानिकरम् (देवपीयुम्) अ० ४।३५।७। विदुषां हिंसकम् (ब्रह्मगवी) म० ५। वेदवाणी (आदीयमाना) अपह्रियमाणा (मृत्योः) मरणस्य (पड्वीशे) अ० ६।९६।२। पश बन्धने−अटि, डित्+विश प्रवेशने−क, दीर्घश्च। पाशप्रवेशे। शृङ्खलायाम् (आद्यति) आङ्पूर्वो दो बन्धने। बध्नाति ॥
