Viewed 72 times
यो॒भिया॑तो नि॒लय॑ते॒ त्वां रु॑द्र नि॒चिकी॑र्षति। प॒श्चाद॑नु॒प्रयु॑ङ्क्षे॒ तं वि॒द्धस्य॑ पद॒नीरि॑व ॥
Pad Path
य: । अभिऽयात: । निऽलयते । त्वाम् । रुद्र । निऽचिकीर्षति । पश्चात् । अनुऽप्रयुङ्क्षे । तम् । विध्दस्य । पदनी:ऽइव ॥२.१३॥
Atharvaveda » Kand:11» Sukta:2» Paryayah:0» Mantra:13
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
ब्रह्मज्ञान से उन्नति का उपदेश।
Word-Meaning: - (यः) जो [दुष्कर्मी] (अभियातः) हारा हुआ (निलयते) छिप जाता है, और (रुद्र) हे रुद्र ! [दुःखनाशक] (त्वा) तुझे (निचिकीर्षति) हराना चाहता है। (पश्चात्) पीछे-पीछे (तम्) उसका (अनुप्रयुङ्क्षे) तू अनुप्रयोग करता है [यथा अपराध दण्ड देता है], (इव) जैसे (विद्धस्य) घायल का (पदनीः) पद खोजिया ॥१३॥
Connotation: - जो दुष्ट गुप्त रीति से भी परमेश्वर की आज्ञा का भङ्ग करता है, परमेश्वर उसे दण्ड ही देता है, जैसे व्याध घायल आखेट के रुधिर आदि चिह्न से खोज लगा कर उसे पकड़ लेता है ॥१३॥इस मन्त्र का मिलान करो-अ० १०।१।२६ ॥
Footnote: १३−(यः) दुष्कर्मी (अभियातः) अभिगतः। अभिभूतः सन् (निलयते) निलीनो गुप्तो भवति (त्वाम्) (रुद्र) म० ३। हे दुःखनाशक (निचिकीर्षति) डुकृञ् करणे, यद्वा, कृञ् हिंसायाम् सन्। निराकर्तुं नितरां हिंसितुं वेच्छति (पश्चात्) निरन्तरम् (अनुप्रयुङ्क्षे) अनुप्रयोगं करोषि। यथापराधं दण्डयसि (तम्) दुष्टम् (विद्धस्य) ताडितस्य। क्षतस्य (पदनीः) पद+णीञ् प्रापणे-क्विप्। पदचिह्नानां नेता। पदानुगामी (इव) यथा ॥
