पव॑स्व सोम म॒न्दय॒न्निन्द्रा॑य॒ मधु॑मत्तमः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
pavasva soma mandayann indrāya madhumattamaḥ ||
पद पाठ
पव॑स्व । सो॒म॒ । म॒न्दय॑न् । इन्द्रा॑य । मधु॑मत्ऽतमः ॥ ९.६७.१६
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:67» मन्त्र:16
| अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:16» मन्त्र:1
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:16
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! आप (मधुमत्तमः) अत्यन्त आनन्दमय हैं, अतः (मन्दयन्) आनन्दित करते हुए (इन्द्राय) उद्योगी के लिए (पवस्व) मङ्गलमय भावों से पवित्र करिए ॥१६॥
भावार्थभाषाः - उद्योगी पुरुष को परमात्मा उत्साहित करके पवित्र करता है ॥१६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
मन्दयन्-मधुमत्तमः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (मन्दयन्) = हमें आनन्दित करता हुआ अथवा प्रभु-स्तवन की वृत्तिवाला बनाता हुआ पवस्व प्राप्त हो। [२] तू (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (मधुमत्तमः) = अतिशयेन माधुर्य को पैदा करनेवाला है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम हमारे जीवन को आनन्दमय व मधुर बनाता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) जगज्जनक परमात्मन् ! त्वम् (मधुमत्तमः) अत्यानन्दमयोऽसि। अतः (मन्दयन्) आनन्दयन् (इन्द्राय) उद्योगिनं (पवस्व) मङ्गलमयभावैः पवित्रय ॥१६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, creative spirit, highest honey sweet of divine ecstasy, flow abundant, pure and purifying, energising and rejoicing for Indra, the divine soul.
