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पव॑मान वि॒दा र॒यिम॒स्मभ्यं॑ सोम सु॒श्रिय॑म् । इन्दो॑ स॒हस्र॑वर्चसम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pavamāna vidā rayim asmabhyaṁ soma suśriyam | indo sahasravarcasam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

पव॑मान । वि॒दाः । र॒यिम् । अ॒स्मभ्य॑म् । सो॒म॒ । सु॒ऽश्रिय॑म् । इन्दो॒ इति॑ । स॒हस्र॑ऽवर्चसम् ॥ ९.४३.४

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:43» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:33» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:2» मन्त्र:4


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (पवमान) हे सर्वपावक परमात्मन् ! (इन्दो) हे प्रकाशमान ! (सोम) हे सौम्य स्वभाववाले ! (अस्मभ्यम्) आप मेरे लिये (सहस्रवर्चसम्) अनेक प्रकार की दीप्तिवाले (सुश्रियम्) सुन्दर शोभा से युक्त (रयिम्) ऐश्वर्य को (विदाः) प्राप्त कराइये ॥४॥
भावार्थभाषाः - वही परमात्मा अनन्त प्रकार के अभ्युदयों का दाता है अर्थात् ब्रह्मवर्चसादि सब तेज उसी की सत्ता से उपलब्ध होते हैं ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'सुश्री सहस्त्रवर्चस्' रयि

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (पवमान) = पवित्र करनेवाले (सोम) = वीर्य तू (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (रयिम्) = रयि शक्ति को विदा प्राप्त करा । 'रयि' धन को कहते हैं। जीवन को धन्य बनानेवाली सभी चीजें धन हैं, रय हैं। सोम के रक्षण से ही इनकी प्राप्ति होती है । [२] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! तू हमारे लिये उस रयि को प्राप्त करा जो कि (सुश्रियम्) = उत्तम श्री [शोभा] को देनेवाली है और (सहस्त्रवर्चसम्) = अनन्त शक्ति को प्राप्त करानेवाली है । सोम से शोभा व शक्ति प्राप्त होती है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम के रक्षण से हम शोभा व शक्ति सम्पन्न रयि को प्राप्त करते हैं।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (पवमान) हे सर्वस्य पवितः (इन्दो) प्रकाशमान (सोम) सौम्य परमात्मन् ! त्वं (अस्मभ्यम्) (सहस्रवर्चसम्) विविधदीप्तिमन्तम् (सुश्रियम्) सुशोभं (रयिम्) विभवं (विदाः) प्रापय ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, gracious and blissful, pure and purifying divinity, bring us wealth, honour and excellence sanctified in truth, beauty and grace of the light and lustre of a thousand suns.