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न॒हि ते॑ शूर॒ राध॒सोऽन्तं॑ वि॒न्दामि॑ स॒त्रा । द॒श॒स्या नो॑ मघव॒न्नू चि॑दद्रिवो॒ धियो॒ वाजे॑भिराविथ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nahi te śūra rādhaso ntaṁ vindāmi satrā | daśasyā no maghavan nū cid adrivo dhiyo vājebhir āvitha ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

न॒हि । ते॒ । शू॒र॒ । राध॑सः । अन्त॑म् । वि॒न्दामि॑ । स॒त्रा । द॒श॒स्य । नः॒ । म॒घ॒ऽव॒न् । नु । चि॒त् । अ॒द्रि॒ऽवः॒ । धियः॑ । वाजे॑भिः । आ॒वि॒थ॒ ॥ ८.४६.११

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:46» मन्त्र:11 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:3» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:11


शिव शंकर शर्मा

इससे ईश्वरीय आनन्द का वर्णन करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्र) हे इन्द्रवाच्य ईश ! (यः+ते+मदः) जो आपका आनन्द (वरेण्यः) सर्वश्रेष्ठ और स्वीकरणीय है, (यः) जो (वृत्रहन्तमः) अतिशय विघ्नविनाशक है और (यः) जो (स्वः+आददिः) सांसारिक संग्रामों में (नृभिः) मनुष्यों से (दुष्टरः) अत्यन्त अनभिभवनीय=अजेय है, उस आनन्द को हम मनुष्य प्राप्त करें ॥८॥
भावार्थभाषाः - इससे यह शिक्षा दी जाती है कि मनुष्य को ईश्वरीय कार्य्य में सदा आनन्दित रहना चाहिये, तब ही मनुष्य सुखी हो सकता है ॥८॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

धन+ शक्ति+बुद्धि

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शूर) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले प्रभो! (ते) = आपके (राधसः) = ऐश्वर्य के (अन्तं) = अन्त को (सत्रा) = सचमुच (न हि विन्दामि) = नहीं प्राप्त कर सकता हूँ-आपका ऐश्वर्य सचमुच अनन्त है। हे (मघवन्) = ऐश्वर्यशालिन् प्रभो ! (नः) = हमारे लिए भी आवश्यक धनों को (नूचित्) = शीघ्र ही (दशस्य) = दीजिए। [२] हे (अद्रिवः) = आदरणीय प्रभो! आप ही इन आवश्यक धनों को देकर (वाजेभिः) = शक्तियों के साथ (धियः) = हमारी बुद्धियों को व कर्मों को (आविथ) = रक्षित करते हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- वे अनन्त ऐश्वर्यवाले प्रभु हमें जीवनयात्रा के लिए आवश्यक धनों को देकर हमारी शक्तियों व बुद्धियों का रक्षण करते हैं।

शिव शंकर शर्मा

अनया मदं विशिनष्टि।

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! यस्ते। मदः=आनन्दः। वरेण्यः=श्रेष्ठः स्वीकरणीयश्च। यश्च वृत्रहन्तमः=अतिशयेन विघ्नविनाशकः। यश्च। स्वः=सुखम्। आददिः=आदाता=आधाता। यश्च। पृतनासु=संग्रामेषु। नृभिः। दुष्टरः=अनभिभवनीयः ॥८॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord generous and brave, I do not find the end and bounds of your gifts of wealth and competence. Lord of wealth, wisdom and excellence, wielder of the thunderbolt of justice and power, grant us the gifts of material, mental and spiritual wealth, and protect and promote our mind and senses with speed and energy for progress in action and attainment.