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अ॒यं विश्वा॑ अ॒भि श्रियो॒ऽग्निर्दे॒वेषु॑ पत्यते । आ वाजै॒रुप॑ नो गमत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ayaṁ viśvā abhi śriyo gnir deveṣu patyate | ā vājair upa no gamat ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒यम् । विश्वाः॑ । अ॒भि । श्रियः॑ । अ॒ग्निः । दे॒वेषु॑ । प॒त्य॒ते॒ । आ । वाजैः॑ । उप॑ । नः॒ । ग॒म॒त् ॥ ८.१०२.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:102» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:10» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:9


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

देवों में श्री, मनुष्यों में बल

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अयं अग्निः) = यह अग्रेणी प्रभु देवेषु देवों के अन्दर होनेवाली (विश्वाः श्रियः) = सब लक्ष्मियों व शोभाओं के (अभिपत्यते) = ईश हैं, उन देवों में उस-उस श्री को प्राप्त करानेवाले ये प्रभु ही हैं । [२] ये 'अग्नि' प्रभु (नः) = हमें भी (वाजैः) = शक्तियों के साथ (उपगमत्) = प्राप्त हों। हमें भी अग्नि के अनुग्रह से बल की प्राप्ति हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-वे अग्रेणी प्रभु सूर्य आदि सब देवों में उस-उस श्री को स्थापित करते हैं। प्रभु हमारे अन्दर भी बल की स्थापना करें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - This Agni among all the divinities of nature and humanity creates, sustains and rules over all the beauties, graces and grandeurs of life. May the lord come to us and bless us with all kinds of knowledge, power, wealth and honour.