पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सूर्यायाः) = सूर्या का (वहतुः) = दहेज [गौ के रूप में दिये जानेवाला सगण] (प्रागात्) = आज गया है, (सविता) = सूर्या के पिता ने (यम्) = जिसको (अवासृजत्) = दिया है । (अघासु) = मघा नक्षत्र में (गावः) = ये दी जानेवाली गौवें (हन्यन्ते) = [ हन् गतौ] भेजी जाती हैं और (अर्जुन्योः) = फल्गुनी नक्षत्र में (पर्युह्यते) = कन्या का विवाह कर दिया जाता है । [२] मघा नक्षत्रवाली पूर्णिमा माघी कहलाती है और फल्गुनी नक्षत्रवाली पूर्णिमा फाल्गुनी। माघी पूर्णिमावाला मास माघ मास है और फाल्गुनी पूर्णिमावाला फाल्गुन । सो विवाह से पूर्व एक मास पूर्व यह गोदान विधि सम्पन्न हो जाती है। यह गौ इसलिए दी जाती है कि गुरुकुल में तपःकृश युवक अब दूध इत्यादि का प्रयोग करके आप्यायित शरीरवाला हो जाए ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-विवाह अर्थात् कन्यादान से एक मास पूर्व गोदान विधि सम्पन्न कर दी जाए।