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नि ग्रामा॑सो अविक्षत॒ नि प॒द्वन्तो॒ नि प॒क्षिण॑: । नि श्ये॒नास॑श्चिद॒र्थिन॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ni grāmāso avikṣata ni padvanto ni pakṣiṇaḥ | ni śyenāsaś cid arthinaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नि । ग्रामा॑सः । अ॒वि॒क्ष॒त॒ । नि । प॒त्ऽवन्तः । नि । प॒क्षिणः॑ । नि । श्ये॒नासः॑ । चि॒त् । अ॒र्थिनः॑ ॥ १०.१२७.५

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:127» मन्त्र:5 | अष्टक:8» अध्याय:7» वर्ग:14» मन्त्र:5 | मण्डल:10» अनुवाक:10» मन्त्र:5


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (ग्रामासः) जनसमूह रात्रि में (नि-अविक्षत) शयन करते हैं-करें (पद्वन्तः-नि) पैरवाले पशु शयन करें (पक्षिणः-नि) पक्षी भी शयन करें (श्येनासः-अर्थिनः) तीव्र गतिमान् भी शयन करें (चित्-नि) थकावट दूर करने के लिए भी शयन करें।
भावार्थभाषाः - रात्रि में मनुष्य पशु पक्षी शान्तिप्रयोजन साधने के लिए शयन करें ॥५॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

विश्राम काल

पदार्थान्वयभाषाः - [१] रात्रि आती है और (ग्रामासः नि अविक्षत) = ग्राम के ग्राम अपने घरों में प्रवेश करते हैं और सोने की तैयारी करते हैं । (पद्वन्तः) = सब पाँववाले द्विपात् मनुष्य व चतुष्पाद् पशु (नि) = सोने के लिए अपने-अपने स्थान में प्रवेश करते हैं । (पक्षिणः) = पक्षी भी (नि) = अपने घोंसलों में प्रवेश करते हैं । [२] (श्येनासः) = अत्यन्त तीव्र गतिवाले, इधर-उधर भागते हुए, एक स्थान से दूसरे स्थान में जाते हुए (अर्थिनः) = धन के चाहनेवाले ये व्यापारी (चित्) = भी अपने-अपने स्थान में पहुँचकर सोने के लिए तैयार होते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - रात्रि सब के विश्राम का कारण बनती है। रात्रि विश्राम काल है, जैसे दिन कार्य काल ।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (ग्रामासः-नि-अविक्षत) जनसमूहा रात्रौ निविशमाणाः शयनं कुर्वन्तु ‘लोडर्थे लुङ्’ (पद्वन्तः-नि) पादवन्तः पशवो निविशमाणाः शयनं कुर्वन्तु (पक्षिणः नि) पक्षिणोऽपि निविशमाणाः शयनं कुर्वन्तु (श्येनासः-अर्थिनः-चित्-नि) शंसनीयगतिमन्तस्तीव्रं गतिमन्तोऽपि रात्रौ-श्रान्तत्वनिवारणाय शयनं कुर्वन्तु ॥५॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - People come back home and rest in sleep. So do animals, so do birds, eagles too. They need rest and sleep after the day’s toil.