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ते नू॒नं नो॒ऽयमू॒तये॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । नयि॑ष्ठा उ नो ने॒षणि॒ पर्षि॑ष्ठा उ नः प॒र्षण्यति॒ द्विष॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

te nūnaṁ no yam ūtaye varuṇo mitro aryamā | nayiṣṭhā u no neṣaṇi parṣiṣṭhā u naḥ parṣaṇy ati dviṣaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ते । नू॒नम् । नः॒ । अ॒यम् । ऊ॒तये॑ । वरु॑णः । मि॒त्रः । अ॒र्य॒मा । नयि॑ष्ठाः । ऊँ॒ इति॑ । नः॒ । ने॒षणि॑ । पर्षि॑ष्ठाः । ऊँ॒ इति॑ । नः॒ । प॒र्षणि॑ । अति॑ । द्विषः॑ ॥ १०.१२६.३

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:126» मन्त्र:3 | अष्टक:8» अध्याय:7» वर्ग:13» मन्त्र:3 | मण्डल:10» अनुवाक:10» मन्त्र:3


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अयं वरुणः-मित्रः-अर्यमा) ये पूर्वोक्त वरुण, मित्र, अर्यमा (ते)  वे सब (नः) हमारी (नूनम्) निश्चय से (ऊतये) रक्षा के लिए (नः-नेषणि) हमारे नेतव्य मार्ग में (उ नयिष्ठाः) अवश्य ले जावें (नः पर्षणि) हमारे पार करने योग्य-प्राप्त करने योग्य विषय में (उ द्विषः-अति) द्वेष करनेवालों का अतिक्रमण करके (पर्षिष्ठाः) पार करो ॥३॥
भावार्थभाषाः - पूर्व कहे हुए मित्रादि रक्षार्थ गन्तव्य मार्ग पर ले जाते हैं और विरोधियों को हटाकर अभीष्ट-उद्देश्य तक पहुँचाते हैं, उनकी अनुमति या अनुकूलता से आचरण करें ॥३॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अकर्त्तव्य से दूर, कर्त्तव्य के समीप

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अयं वरुणः) = यह वरुण पाप निवारण की देवता, (अयं मित्रः) = यह प्रमीति से, रोगों व पापों से त्राण करनेवाली, बचानेवाली देवता, (अयं अर्यमा) = यह 'अरीन् यच्छति' काम-क्रोध आदि शत्रुओं का नियमन करनेवाली देवता (ते) = वे सब आप (नूनम्) = निश्चय से (नः) = हमारे (ऊतये) = रक्षण के लिए होते हो। (उ) = निश्चय से (नः) = हमें (नेषणि) = नेतव्य विषय में (नयिष्ठाः) = ले चलो। अर्थात् 'वरुण, मित्र, अर्यमा' की कृपा से हम उन्हीं मार्गों पर चलें, जिन पर कि हमें चलना चाहिए। [२] हे वरुणादि देवो ! (उ) = और (नः) = हमें (पर्षणि) = पारयितव्य विषय में (पर्षिष्ठाः) = पार करो । (द्विषः अति) [पर्षिष्ठा: ] = सब द्वेषों से तो हमें पार करो ही । हम किसी भी पाप के गर्त में न गिरें, द्वेष में तो कभी भी न पड़ें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- 'वरुण-मित्र अर्यमा' की आराधना से हम करने योग्य चीजों को करें, न करने योग्य चीजों को न करें, द्वेष से अवश्य दूर रहें।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अयं वरुणः-मित्रः-अर्यमा) एष वरुणः-मित्रः-अर्यमा (ते नः-नूनम्-ऊतये) ते सर्वेऽवश्यमस्माकं रक्षायै (नः-नेषणि-उ नयिष्ठाः) अस्मान्नेतव्ये मार्गे हि नयत (नः पर्षणि-उ द्विषः-अति पर्षिष्ठाः) अस्मान्पारयितव्ये प्रापयितव्ये विषये द्वेष्टॄन्-अतिक्रम्य-परास्य पारय-पारयत ॥३॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - This Varuna, this Mitra, this Aryama, surely they are for our protection, guidance and success. O protective and guiding divinities of rectitude, take us and guide us on the path we ought to take, lead us to the goal we ought to reach, take us across and beyond the hate, jealousy and enmity we ought to avoid.