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व॒यं वो॑ वृ॒क्तब॑र्हिषो हि॒तप्र॑यस आनु॒षक् । सु॒तसो॑मासो वरुण हवामहे मनु॒ष्वदि॒द्धाग्न॑यः ॥

English Transliteration

vayaṁ vo vṛktabarhiṣo hitaprayasa ānuṣak | sutasomāso varuṇa havāmahe manuṣvad iddhāgnayaḥ ||

Pad Path

व॒यम् । वः॒ । वृ॒क्तऽब॑र्हिषः । हि॒तऽप्र॑यसः । आ॒नु॒षक् । सु॒तऽसो॑मासः । व॒रु॒ण॒ । ह॒वा॒म॒हे॒ । म॒नु॒ष्वत् । इ॒द्धऽअ॑ग्नयः ॥ ८.२७.७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:27» Mantra:7 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:32» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:7


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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः वही विषय आ रहा है।

Word-Meaning: - (वरुण) हे राजप्रतिनिधे ! (वः) आप लोगों को (वयम्) हम सब (आनुषक्) सर्वदा और क्रम से (हवामहे) न्यायार्थ बुलाते हैं। जो हम (वृक्तबर्हिषः) आसनादि सामग्रीसम्पन्न हैं, (हितप्रयसः) जिनके अन्न हितकार्य्य में लगे रहते हैं (सुतसोमासः) सोमादि यज्ञ करनेवाले (मनुष्वत्) विज्ञानी पुरुष के समान (इद्धाग्नयः) और जो सदा अग्निहोत्रादि कर्म में लगे रहते हैं ॥७॥
Connotation: - अपने निकट जो वस्तु हों, उनसे अपना और पर का हित सिद्ध करे और समय-२ पर अच्छे पुरुषों को बुलाकर अपने गृह पर सत्कार करे ॥७॥
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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तदनुवर्तते।

Word-Meaning: - वरुण=हे राजप्रतिनिधे ! वयम्। मनुष्वद्=विज्ञानिवत्। वः=युष्मान्। आनुषक्=क्रमशः सर्वदा वा। हवामहे। कीदृशा वयम्। वृक्तबर्हिषः=बर्हिरादिसाधनसम्पन्नाः। हितप्रयसः= हितधनाः। सुतसोमासः=सोमादियज्ञकारिणः। पुनः। इद्धाग्नयः। समिद्धाग्नयः ॥७॥