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त्वां हि सु॒प्सर॑स्तमं नृ॒षद॑नेषु हू॒महे॑ । ग्रावा॑णं॒ नाश्व॑पृष्ठं मं॒हना॑ ॥

English Transliteration

tvāṁ hi supsarastamaṁ nṛṣadaneṣu hūmahe | grāvāṇaṁ nāśvapṛṣṭham maṁhanā ||

Pad Path

त्वाम् । हि । सु॒प्सरः॑ऽतमम् । नृ॒ऽसद॑नेषु । हू॒महे॑ । ग्रावा॑णम् । न । अश्व॑ऽपृष्ठम् । मं॒हना॑ ॥ ८.२६.२४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:24 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:30» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:24


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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः वही विषय आ रहा है।

Word-Meaning: - हे सेनानायक ! (नृसदनेषु) मनुष्यों की बड़ी-२ सभाओं में (त्वां हि) आपको (हूमहे) निमन्त्रण देकर बुलाते हैं (सुप्सरस्तमम्) अपनी कीर्ति और यश से आपका शरीर अतिशय सुगन्धित और सुन्दर हो रहा है, जो आप (ग्रावाणम्+न) अपने कार्य्य में अचलवत् अचल हैं (अश्वपृष्ठम्) और जिसके सर्वाङ्ग सांग्रामिक घोड़े के समान बलिष्ठ और संगठित हैं ॥२४॥
Connotation: - प्रत्येक शुभकर्म में राजवत् सेनानी भी आदरणीय है ॥२४॥
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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तदनुवर्तते।

Word-Meaning: - हे वायो ! नृसदनेषु=मनुष्यसभासु। त्वां हि। हूमहे। कीदृशम्। सुप्सरस्तमम्=अतिशोभनम्। ग्रावाणम्+न=अचलसमम्। पुनः। अश्वपृष्ठम्=अश्ववत् दृढाङ्गम्। पुनः। मंहना=महत्वेन युक्तम् ॥२४॥