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न्य१॒॑ग्निं जा॒तवे॑दसं होत्र॒वाहं॒ यवि॑ष्ठ्यम्। दधा॑ता दे॒वमृ॒त्विज॑म् ॥७॥

English Transliteration

ny agniṁ jātavedasaṁ hotravāhaṁ yaviṣṭhyam | dadhātā devam ṛtvijam ||

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Pad Path

नि। अ॒ग्निम्। जा॒तऽवे॑दसम्। हो॒त्र॒ऽवाह॑म्। यवि॑ष्ठ्यम्। दधा॑त। दे॒वम्। ऋ॒त्विज॑म् ॥७॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:26» Mantra:7 | Ashtak:4» Adhyay:1» Varga:20» Mantra:2 | Mandal:5» Anuvak:2» Mantra:7


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब अग्निधारणविषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! आप लोग (यविष्ठ्यम्) अतिशयित युवा जनों में प्रसिद्ध हुए (ऋत्विजम्) यज्ञसाधक और (देवम्) दिव्य गुणवाले के सदृश (जातवेदसम्) उत्पन्न हुए पदार्थों में विद्यमान (होत्रवाहम्) हवन की हुई वस्तुओं को धारण करनेवाले (अग्निम्) अग्नि को (नि, दधाता) निरन्तर धारण करो ॥७॥
Connotation: - जैसे शिल्पविद्या के जाननेवाले जन अपने कार्य्य को सिद्ध करते हैं, वैसे ही अग्नि आदि भी कार्य की सिद्धि करते हैं ॥७॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथाग्निधारणविषयमाह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! यूयं यविष्ठ्यमृत्विजं देवमिव जातवेदसं होत्रवाहमग्निं नि दधाता ॥७॥

Word-Meaning: - (नि) (अग्निम्) पावकम् (जातवेदसम्) जातेषु विद्यमानम् (होत्रवाहम्) यो होत्राणि हुतानि द्रव्याणि वहति (यविष्ठ्यम्) योऽतिशयितेषु युवसु भवम् (दधाता) धरत। अत्र संहितायामिति दीर्घः। (देवम्) दिव्यगुणम् (ऋत्विजम्) यज्ञसाधकम् ॥७॥
Connotation: - यथा शिल्पिनः स्वकार्य्यं साध्नुवन्ति तथैवाग्न्यादयोऽपि कार्य्यसिद्धिं कुर्वन्ति ॥७॥
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जसे शिल्पीजन (कारागीर) स्वतःचे कार्य करतात तसाच अग्नी इत्यादीही कार्यसिद्धी करतात. ॥ ७ ॥