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अधा॒ न्व॑स्य॒ जेन्य॑स्य पु॒ष्टौ वृथा॒ रेभ॑न्त ईमहे॒ तदू॒ नु । स॒र॒ण्युर॑स्य सू॒नुरश्वो॒ विप्र॑श्चासि॒ श्रव॑सश्च सा॒तौ ॥

English Transliteration

adhā nv asya jenyasya puṣṭau vṛthā rebhanta īmahe tad ū nu | saraṇyur asya sūnur aśvo vipraś cāsi śravasaś ca sātau ||

Pad Path

अध॑ । नु । अ॒स्य॒ । जेन्य॑स्य । पु॒ष्टौ । वृथा॑ । रेभ॑न्तः । ई॒म॒हे॒ । तत् । ऊँ॒ इति॑ । नु । स॒र॒ण्युः । अ॒स्य॒ । सू॒नुः । अश्वः॑ । विप्रः॑ । च॒ । अ॒सि॒ । श्रव॑सः । च॒ । सा॒तौ ॥ १०.६१.२४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:61» Mantra:24 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:30» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:5» Mantra:24


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अध नु) और फिर (अस्य जेन्यस्य) इस जगत्स्वामी परमात्मा की (पुष्टौ) आत्मपुष्टि-पोषणशक्ति के निमित्त (वृथा) अनायास-सरल भाव से (रेभन्तः) स्तुति करते हुए (तत्-उ नु-ईमहे) प्रार्थना करते हैं (अस्य सरण्युः) इस जगत् का चलानेवाला तथा (सूनुः) उत्पादक, (अश्वः) व्यापक (च) तथा (श्रवसः) श्रवणीय यशोरूप भोग की (सातौ विप्रः-असि) प्रप्ति के लिए विशिष्टतया पूर्ण करनेवाला हे परमात्मन् ! तू है ॥२४॥
Connotation: - परमात्मा जगत् का उत्पादक, इसमें व्यापक और इसका नियन्ता है तथा हमार पोषणकर्ता है, उसके श्रवणीय यश और गुणों तथा सुखलाभ के लिए प्रार्थना करनी चाहिए ॥२४॥