Go To Mantra

भ॒द्रं नो॒ अपि॑ वातय॒ मन॑: ॥

English Transliteration

bhadraṁ no api vātaya manaḥ ||

Pad Path

भ॒द्रम् । नः॒ । अपि॑ । वा॒त॒य॒ । मनः॑ ॥ १०.२०.१

Rigveda » Mandal:10» Sukta:20» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:1


Reads times

BRAHMAMUNI

इस सूक्त में राजा, गोपालक, इन्द्रियस्वामी आत्मा द्वारा प्रजाओं, गौओं, इन्द्रियों के नियन्त्रण और भलीभाँति रक्षणादि व्यवहार उपदिष्ट हैं।

Word-Meaning: - (नः मनः) हे अग्रणायक परमात्मन् वा राजन् ! हमारे अन्तःकरण को (भद्रम्-अपि-वातय) कल्याणमार्ग पर प्रेरित कर-चला ॥१॥
Connotation: - परमात्मा या राजा हमारे अन्तःकरण को कल्याणकारी मार्ग पर चलाये, उपासक तथा प्रजाएँ इस बात की अभिलाषा करें ॥१॥
Reads times

BRAHMAMUNI

अत्र सूक्ते राज्ञा, गोपतिना, इन्द्रियस्वामिना प्रजानां गवामिन्द्रियाणां नियन्त्रणं यथावद् रक्षणादिव्यवहाराश्चोपदिश्यन्ते।

Word-Meaning: - (नः मनः) हे अग्रणायक परमात्मन् ! यद्वा राजन् ! अस्माकं मनोऽन्तःकरणम् (भद्रम्-अपि वातय) कल्याणं कल्याणमार्गं प्रति प्रेरय चालय “वात गतिसुखसेवनेषु” [चुरादिः] ॥१॥