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पू॒षेमा आशा॒ अनु॑ वेद॒ सर्वा॒: सो अ॒स्माँ अभ॑यतमेन नेषत् । स्व॒स्ति॒दा आघृ॑णि॒: सर्व॑वी॒रोऽप्र॑युच्छन्पु॒र ए॑तु प्रजा॒नन् ॥

English Transliteration

pūṣemā āśā anu veda sarvāḥ so asmām̐ abhayatamena neṣat | svastidā āghṛṇiḥ sarvavīro prayucchan pura etu prajānan ||

Pad Path

पू॒षा । इ॒माः । आशाः॑ । अनु॑ । वे॒द॒ । सर्वाः॑ । सः । अ॒स्मान् । अभ॑यऽतमेन । ने॒ष॒त् । स्व॒स्ति॒ऽदाः । आघृ॑णिः । सर्व॑ऽवीरः । अप्र॑ऽयुच्छन् । पु॒रः । ए॒तु॒ । प्र॒ऽजा॒नन् ॥ १०.१७.५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:17» Mantra:5 | Ashtak:7» Adhyay:6» Varga:23» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:5


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पूषा) पोषण करनेवाला परमात्मा (इमाः सर्वाः-आशाः-अनुवेद) इन सारी दिशाओं को प्राप्त होकर जानता है (सः-अस्मान्-अभयतमेन नेषत्) वह हम उपासकों को अत्यन्त भयरहित मार्ग से ले जाता है (स्वस्तिदाः) वह कल्याणदाता (आघृणिः) समन्तरूप से प्राप्त दीप्तिवाला है (सर्ववीराः) सर्वबलयुक्त (अप्रयुच्छन्) सदा सावधान तथा अनुपेक्षमाण है, वह (प्रजानन्) हमें बोध देता हुआ (पुरः एतु) साक्षात् प्राप्त हो ॥५॥
Connotation: - परमात्मा हमारा पोषण करता है, वह सारी दिशाओं में वर्तमान प्राणी अप्राणी को जानता है। भयरहित मार्ग से उपासकों को जीवन-यात्रा कराता है, प्रसिद्ध ज्योति और समस्त बलों से युक्त हुआ बिना प्रमाद या उपेक्षा के हमें बोध देता है। हमें सबसे पूर्व उसकी उपासना करनी चाहिए ॥५॥
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पूषा) पोषयिता परमात्मा (इमाः-आशाः-सर्वाः-अनुवेद) एताः सर्वा खलु दिशोऽनुगत्य जानाति “आशा दिङ्नाम” [निघ०१।६] (सः-अस्मान्-अभयतमेन नेषत्) सोऽस्मान्-उपासकानत्यन्तं भयरहितेन मार्गेण नयेत्-नयति “णीञ् प्रापणे” [भ्वादिः] लेटि सिपि (स्वस्तिदाः) स कल्याणदाता (आघृणिः) आगतघृणिः-समन्तात् प्राप्तज्योतिष्को प्राप्तदीपिको वा (सर्ववीरः) सर्वबलयुक्तः (अप्रयुच्छन्) सावधानोऽनुपेक्षमाणः (प्रजानन्) अस्मान् प्रजानन् प्रबोधयन् सन् (पुरः-एतु) साक्षात् प्राप्तो भवतु ॥५॥