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प्र॒सद्य॒ भस्म॑ना॒ योनि॑म॒पश्च॑ पृथि॒वीम॑ग्ने। स॒ꣳसृज्य॑ मा॒तृभि॒ष्ट्वं ज्योति॑ष्मा॒न् पुन॒रास॑दः ॥३८ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

प्र॒सद्येति॑ प्र॒ऽसद्य॑। भस्म॑ना। योनि॑म्। अ॒पः। च॒। पृ॒थि॒वीम्। अ॒ग्ने॒। सं॒ऽसृज्येति॑ स॒म्ऽसृज्य॑। मा॒तृभि॒रिति॑ मा॒तृऽभिः॑। त्वम्। ज्योति॑ष्मान्। पुनः॑। आ। अ॒स॒दः॒ ॥३८ ॥

यजुर्वेद » अध्याय:12» मन्त्र:38


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हिन्दी - स्वामी दयानन्द सरस्वती

मरण समय में शरीर का क्या होना चाहिये, यह विषये अगले मन्त्र में कहा है ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (अग्ने) प्रकाशमान पुरुष सूर्य्य के समान (ज्योतिष्मान्) प्रशंसित प्रकाश से युक्त जीव ! (त्वम्) तू (भस्मना) शरीर दाह के पीछे (पृथिवीम्) पृथिवी (च) अग्नि आदि और (अपः) जलों के बीच (योनिम्) देह धारण के कारण को (प्रसद्य) प्राप्त हो और (मातृभिः) माताओं के उदर में वास करके (पुनः) फिर (आसदः) शरीर को प्राप्त होता है ॥३८ ॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे जीवो ! तुम लोग जब शरीर को छोड़ो, तब यह शरीर राख रूप होकर पृथिवी आदि पाँच भूतों के साथ मिल जाता है। तुम अर्थात् आत्मा माता के शरीर में गर्भाशय में पहुँच, फिर शरीर धारण किये हुए विद्यमान होते हो ॥३८ ॥
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संस्कृत - स्वामी दयानन्द सरस्वती

मरणान्ते शरीरस्य का गतिः कार्य्येत्याह ॥

अन्वय:

(प्रसद्य) प्रगत्य (भस्मना) दग्धेन (योनिम्) देहधारणकारणम् (अपः) (च) अग्न्यादिकम् (पृथिवीम्) (अग्ने) प्रकाशमान (संसृज्य) संसर्गीभूत्वा (मातृभिः) (त्वम्) (ज्योतिष्मान्) प्रशस्तप्रकाशयुक्तः (पुनः) पश्चात् (आ) (असदः) प्राप्नोषि। [अयं मन्त्रः शत०६.८.२.६ व्याख्यातः] ॥३८ ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे अग्ने सूर्य्य इव ज्योतिष्मान् ! त्वं भस्मना पृथिवीं चापश्च योनिं प्रसद्य मातृभिः सह संसृज्य पुनरासदः ॥३८ ॥
भावार्थभाषाः - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। हे जीवाः ! भवन्तो यदा शरीरं त्यजत, तदैतद्भस्मीभूतं सत् पृथिव्यादिना सह संयुनक्ति, यूयमात्मानश्चाम्बाशरीरषेु गर्भाशयं प्रविश्य पुनः सशरीराः सन्तो विद्यमाना भवत ॥३८ ॥
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मराठी - माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. हे जीवांनो ! तुम्ही जेव्हा शरीर सोडाल तेव्हा हे शरीर राखरूपाने पृथ्वी इत्यादी पंचमहाभूतांमध्ये विलीन होऊ द्या. तुमचा आत्मा मातेच्या शरीरात गर्भाशयामध्ये प्रवेश करून पुनः शरीर धारण करून पुनर्जन्म घेतो.