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मा नो॑ दे॒वानां॒ विश॑: प्रस्ना॒तीरि॑वो॒स्राः । कृ॒शं न हा॑सु॒रघ्न्या॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

mā no devānāṁ viśaḥ prasnātīr ivosrāḥ | kṛśaṁ na hāsur aghnyāḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मा । नः । दे॒वाना॑म् । विशः॑ । प्र॒स्ना॒तीःऽइ॑व । उ॒स्राः । कृ॒शम् । न । हा॒सुः॒ । अघ्न्याः॑ ॥ ८.७५.८

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:75» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:25» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:8


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे विद्वद्गण ! (सहूतिभिः) समान प्रार्थनाओं से (तम्) उस ईश्वर को (आनमस्व) नमस्कार करो (यथा) जैसे (ऋभवः) रथकार (नेमिम्) रथ का सत्कार करते हैं, तद्वत्। (अङ्गिरः) हे अङ्गों का रसप्रद (यज्ञम्) शुभकर्म (नेदीयः) हम लोगों के निकट कीजिये ॥५॥
भावार्थभाषाः - सदा ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिये, जिससे हम लोग शुभकर्म में सदा प्रवृत्त रहें ॥५॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

देवानां विशः + अघ्न्याः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (नः) = हमें (देवानां विशः) = देवों की प्रजाएँ- दिव्यगुणों के प्रवेश (मा हासुः) = मत छोड़ जाएँ, अर्थात् हम सदा दिव्यगुणों के प्रवेशवाले बनें, इसी प्रकार (अघ्न्याः) = ये अहन्तव्य ज्ञान की वाणियाँ हमें (न) = नहीं (हासुः) = छोड़ जाएँ। ज्ञानदुग्ध को देनेवाली ये वेदवाणीरूप गौएँ हमारे लिय अहन्तव्य हों। हम सदा इनका स्वाध्याय द्वारा दोहन करें। [२] (इव) = जैसे (प्रस्नाती:) = [ पयः क्षरन्ती:] दूध को प्रस्तुत करती हुई (उस्त्राः) = गौएँ (कृशं) = छोटे [दुर्बल] बछड़े को नहीं छोड़ती, इसी प्रकार हमें दिव्यगुणों के प्रवेश व वेदवाणियाँ न छोड़ जाएँ। इन वेदवाणीरूप गौओं के ज्ञानदुग्ध ने ही तो हमें सबल बनाना है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमें दिव्यगुण व वेदवाणियाँ इस प्रकार न छोड़ जायँ, जैसे दूध को क्षरित करती हुई गोएँ छोटे बछड़े को नहीं छोड़ जातीं।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे विद्वन् ! सहूतिभिः=समानप्रार्थनाभिः। तं+आनमस्व= नमस्कारं कुरु। यथा ऋभवः=रथकाराः। नेमिम्= नमस्कुर्वन्ति। हे अङ्गिरः=अङ्गानां रस ! यज्ञम्+नेदीयः= अन्तिकतमं कुरु ॥५॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Let the forces of the communities of people protected by noble and divine powers never forsake us just as the radiating dawns do not neglect us, and just as cows too, which must not be hurt do not abandon their emaciated calves.