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या नु श्वे॒ताव॒वो दि॒व उ॒च्चरा॑त॒ उप॒ द्युभि॑: । इ॒न्द्रा॒ग्न्योरनु॑ व्र॒तमुहा॑ना यन्ति॒ सिन्ध॑वो॒ यान्त्सीं॑ ब॒न्धादमु॑ञ्चतां॒ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yā nu śvetāv avo diva uccarāta upa dyubhiḥ | indrāgnyor anu vratam uhānā yanti sindhavo yān sīm bandhād amuñcatāṁ nabhantām anyake same ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

या । नु । श्वे॒तौ । अ॒वः । दि॒वः । उ॒त्ऽचरा॑तः । उप॑ । द्युऽभिः॑ । इ॒न्द्रा॒ग्न्योः । अनु॑ । व्र॒तम् । उहा॑नाः । य॒न्ति॒ । सिन्ध॑वः । यान् । सी॒म् । ब॒न्धात् । अमु॑ञ्चताम् । नभ॑न्ताम् । अ॒न्य॒के । स॒मे॒ ॥ ८.४०.८

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:40» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:25» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:8


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

नीचे से ऊपर की ओर

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (या:) = जो (नु) = निश्चय से (श्वेतौ) = जीवन को शुद्ध बनानेवाले इन्द्र और अग्नि-बल व प्रकाश के देवता (द्युभिः) = अपने प्रकाशों से (अवः) = अधः प्रदेश से (दिवः उप) = द्युलोक के समीप (उच्चरातः) = ऊपर प्राप्त कराते हैं, उन (इन्द्राग्न्योः) = इन्द्र और अग्नि के (व्रतं) = व्रत को (उहाना) = धारण करते हुए, अर्थात् इन्द्र अग्नि के आराधन के लिए आवश्यक व्रतों को धारण करते हुए (सिन्धवः) = गतिशील पुरुष (यन्ति) = जीवन मार्ग पर चलते हैं। [२] (यान्) = जिन सिन्धुओं को, गतिशील पुरुषों को (सीम्) = निश्चय से इन्द्र और अग्नि (बन्धात् अमुञ्चतां) = बन्ध से छुड़ाते हैं। ये इन्द्र और अग्नि व्रती पुरुष के बन्धनों को समाप्त करके उन्हें जीवन-मरण के चक्र से ऊपर उठाते हैं। इन इन्द्र और अग्नि की उपासना से (समे) = सब (अन्यके) = शत्रु (नभन्ताम्) = नष्ट हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:- इन्द्र और अग्नि व्रतमय जीवनवाले पुरुष को उन्नत करते हैं। विषय के बन्धनों से मुक्त करके ये उन्हें मोक्ष का पात्र बनाते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Whoever Indra and Agni, commanding ruling power and light of knowledge, raise from lower regions of ignorance and darkness, and take them to the higher regions of knowledge and culture, and the seas which they release from bondage, all of them, thus raised and guided, observe their divine laws and live a dynamic life of freedom and enlightenment. May all darkness, ignorance, superstition and slavery vanish from the world, giving way to freedom and progress.