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पु॒त्रिणा॒ ता कु॑मा॒रिणा॒ विश्व॒मायु॒र्व्य॑श्नुतः । उ॒भा हिर॑ण्यपेशसा ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

putriṇā tā kumāriṇā viśvam āyur vy aśnutaḥ | ubhā hiraṇyapeśasā ||

पद पाठ

पु॒त्रिणा॑ । ता । कु॒मा॒रिणा॑ । विश्व॑म् । आयुः॑ । वि । अ॒श्नु॒तः॒ । उ॒भा । हिर॑ण्यऽपेशसा ॥ ८.३१.८

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:31» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:39» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:8


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - पुनरपि दम्पती के विशेषण में कहा जाता है−जो स्त्री-पुरुष सदा ईश्वर की आज्ञापालन करते हुए शुभकर्म में निरत रहते हैं, (ता) वे स्त्री, पुरुष (पुत्रिणा) अच्छे पुत्रवाले और (कुमारिणा) सदा महोत्सवों से चित्तविनोदशील होते हैं और (विश्वम्) सम्पूर्ण (आयुः) आयु (व्यश्नुतः) पाते हैं। तथा (उभा) वे स्त्री, पुरुष दोनों (हिरण्यपेशसा) सुवर्णों से सुभूषित रूपवाले होते हैं अर्थात् ऐहिक सम्पूर्ण सुखों से सदा संयुक्त रहते हैं ॥८॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सन्तान सुखमय पूर्ण जीवन ज्ञान

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (पुत्रिणा) = प्रशस्त पुत्रोंवाले, (ता) = वे पति-पत्नी (कुमारिणा) = [कुमार क्रीडायाम्] पुत्रों व नप्ताओं से खेलते हुए [क्रीडन्तौ पुत्रैर्नसृभिः] (विश्वं आयुः) = पूर्ण जीवन को (व्यश्नुतः) = प्राप्त करते हैं। [२] (उभा) = ये दोनों (हिरण्यपेशसा) = हितरमणीय ज्ञान से सुन्दर रूपवाले होते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम उत्तम सन्तानोंवाले हों। सन्तानों के साथ सुख को प्राप्त होते हुए पूर्ण जीवन को प्राप्त करें। ज्ञान से सुन्दर रूपवाले बनें।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - पुनरपि दम्पती विशिष्येते। यौ दम्पती शुभकर्मरतौ भवतः। ता=तौ पुत्रिणा पुत्रवन्तौ। कुमारिणा=कुमारयितुं क्रीडितुं शीलमनयोरिति कुमारिणौ क्रीडावन्तौ सदा महोत्सवैः। चित्तविनोदिनावित्यर्थः। पुनः। विश्वं सर्वम्। आयुः। व्यश्नुतः व्याप्नुतः। पुनस्तावुभौ। हिरण्यपेशसा हिरण्यैः कनकैर्भूयितरूपौ भवतः ॥८॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - They live a full happy life blest with sons and daughters and golden means of living in prosperity and decency.