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स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥
पदार्थान्वयभाषाः - हे (देवाः) विद्वान् जनो ! आप लोग जैसे हम लोग (उरौ) बहु (अनिबाधे) व्यवहार में (स्याम) होवें वैसे करिये ॥१६॥
भावार्थभाषाः - विद्वानों को चाहिये कि सब मनुष्य जैसे विघ्नरहित होवें, वैसा करें ॥१६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
विशाल अनिबाध जीवन
पदार्थान्वयभाषाः - ४२.१७ पर अर्थ द्रष्टव्य है।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
अन्वय:
हे देवा ! यूयं यथा वयमुरावनिबाधे स्याम तथा विदधत ॥१६॥
पदार्थान्वयभाषाः - (उरौ) बहौ (देवाः) विद्वांसः (अनिबाधे) व्यवहारे (स्याम) भवेम ॥१६॥
भावार्थभाषाः - विद्वद्भिः सर्वे मनुष्या यथा निर्विघ्नाः स्युस्तथा विधेयम् ॥१६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Divinities, may we ever be in the light of your unbounded grace, free and uninterrupted.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The duties and nature of a learned person are stated.
अन्वय:
O enlightened persons ! do arrange in such manner that we may be free from all obstacles in a vast dealing.
भावार्थभाषाः - It is the duty of the enlightened persons to do such things which may make all men free from obstacles.
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माता सविता जोशी
(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - सर्व माणसे विघ्नरहित होतील असे विद्वानांनी वागावे. ॥ १६ ॥
