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अध्व॑र्यवो॒ यो दृभी॑कं ज॒घान॒ यो गा उ॒दाज॒दप॒ हि ब॒लं वः। तस्मा॑ ए॒तम॒न्तरि॑क्षे॒ न वात॒मिन्द्रं॒ सोमै॒रोर्णु॑त॒ जूर्न वस्त्रैः॑॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

adhvaryavo yo dṛbhīkaṁ jaghāna yo gā udājad apa hi valaṁ vaḥ | tasmā etam antarikṣe na vātam indraṁ somair orṇuta jūr na vastraiḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अध्व॑र्यवः। यः। दृभी॑कम्। ज॒घान॑। यः। गाः। उ॒त्ऽआज॑त्। अप॑। हि। ब॒लम्। वरिति॒ वः। तस्मै॑। ए॒तम्। अ॒न्तरि॑क्षे। न। वात॑म्। इन्द्र॑म्। सोमैः॒। आ। ऊ॒र्णु॒त॒। जूः। न। वस्त्रैः॑॥

ऋग्वेद » मण्डल:2» सूक्त:14» मन्त्र:3 | अष्टक:2» अध्याय:6» वर्ग:13» मन्त्र:3 | मण्डल:2» अनुवाक:2» मन्त्र:3


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

अब राज विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

पदार्थान्वयभाषाः - हे (अध्वर्यवः) यज्ञ संपादन करनेवाले जनो ! (यः) जो (दृभीकम्) भयङ्कर प्राणी को (जघान) मारता है किसको कि (यः) जो (गाः) गौओं को (उदाजत्) विविध प्रकार से फेंके अर्थात् उठाय उठाय पटके मारे और (बलम्) बल को (अप,वः) अपवारण करे रोके (तस्मै) उसके लिये (हि) ही (एतम्) इस यज्ञ को (अन्तरिक्षे) अन्तरिक्ष में (वातम्) पवन के (न) समान वा (इन्द्रम्) मेघों की धारणा करनेवाले सूर्य को (वस्त्रैः) वस्त्रों से (जूः) बुड्ढे के (न) समान (सोमैः) ओषधियों वा ऐश्वर्यों से (आ, ऊर्णुत) आच्छादित करो अर्थात् अपने यज्ञधूम से सूर्य को ढाँपो ॥३॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो राजपुरुष भयानक गोहत्या करनेवालों को मारते हैं और उत्तमों की रक्षा करते हैं, वे निर्भय होते हैं ॥३॥
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

अथ राजविषयमाह।

अन्वय:

हे अध्वर्यवो यो दृभीकं जघान कं यो गा उदाजद् बलमप वस्तस्मै ह्येतमन्तरिक्षे वातन्नेन्द्रं वस्त्रैर्जूर्न सोमैरोर्णुत ॥३॥

पदार्थान्वयभाषाः - (अध्वर्यवः) यज्ञसम्पादकाः (यः) (दृभीकम्) भयकरम् (जघान) हन्यात् (यः) (गोः) धेनूः (उदाजत्) विक्षिपेद्धन्यात् (अप) (हि) (बलम्) (वः) वृणोति (तस्मै) (एतम्) यज्ञम् (अन्तरिक्षे) (न) इव (वातम्) वायुम् (इन्द्रम्) मेघानां धारकम् (सोमैः) ओषधिरसैरैश्वर्यैर्वा (आ) (ऊर्णुत) आच्छादयत (जूः) जीर्णावस्थां प्राप्तः (न) इव (वस्त्रैः) वासोभिः ॥३॥
भावार्थभाषाः - अत्रोपमालङ्कारः। ये राजपुरुषा भयानकान् गोहत्याकर्त्तॄन् घ्नन्ति, उत्तमान् रक्षन्ति ते निर्भया जायन्ते ॥३॥
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - भावार्थ -या मंत्रात उपमालंकार आहे. जे राजपुरुष गोहत्या करणाऱ्यांना मारतात व उत्तम लोकांचे रक्षण करतात ते निर्भय असतात. ॥ ३ ॥