Go To Mantra
Viewed 440 times

स वां॑ य॒ज्ञेषु॑ मानवी॒ इन्दु॑र्जनिष्ट रोदसी । दे॒वो दे॑वी गिरि॒ष्ठा अस्रे॑ध॒न्तं तु॑वि॒ष्वणि॑ ॥

English Transliteration

sa vāṁ yajñeṣu mānavī indur janiṣṭa rodasī | devo devī giriṣṭhā asredhan taṁ tuviṣvaṇi ||

Mantra Audio
Pad Path

सः । वा॒म् । य॒ज्ञेषु॑ । मा॒न॒वी॒ इति॑ । इन्दुः॑ । ज॒नि॒ष्ट॒ । रो॒द॒सी॒ इति॑ । दे॒वः । दे॒वी॒ इति॑ । गि॒रि॒ऽस्थाः । अस्रे॑धन् । तम् । तु॒वि॒ऽस्वनि॑ ॥ ९.९८.९

Rigveda » Mandal:9» Sukta:98» Mantra:9 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:24» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:9


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सः) वह उक्त परमात्मा (वाम्) तुम कर्मयोगी और ज्ञानयोगियों के (यज्ञेषु) यज्ञों में (जनिष्ट) शुभफलों को उत्पन्न करता है, इसलिये (मानवी) हे मनुष्यसृष्टि के कर्मयोगी और ज्ञानयोगी विद्वानों ! और (रोदसी) द्युलोक और पृथिवीलोक के मध्य में (देवी) दिव्य गुणवती स्त्रियों ! (इन्दुः) वह प्रकाशस्वरूप परमात्मा (देवः) जो दिव्यगुणयुक्त है, (गिरिष्ठाः) जो सब ब्रह्माण्डों में स्थित है, तुम (तुविष्वणि) ज्ञानयज्ञों में (तम्) उस परमात्मा का (अस्रेधन्) साक्षात्कार करो ॥९॥
Connotation: - जीवमात्र के शुभ-अशुभ कर्मों के फलों का दाता एकमात्र परमात्मा ही है ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मानवी रोदसी

Word-Meaning: - (सः इन्दुः) = वह सोम (वाम्) = आप दोनों (मानवी) = मानव हितकारी (रोदसी) = द्यावापृथिवी को, मस्तिष्क व शरीर को (जनिष्ट) = प्रादुर्भूत करता है। मस्तिष्क व शरीर के विकास के द्वारा यह सोम यज्ञेषु यज्ञों में हमें प्रवृत्त करता है। यज्ञों के निमित्त ही तो सोम शरीर को शक्तिशाली व मस्तिष्क को ज्ञान दीप्त बनाता है। यह (देवः) = प्रकाशमय सोम (देवी) = प्रकाशमय द्यावापृथिवी को ही उत्पन्न करता है, शरीर को तेजोमय व मस्तिष्क को ज्ञानदीप्त करता है। यह तो सोम (गिरिष्ठाः) = ज्ञान की वाणियों में स्थित है, ज्ञान की वृद्धि का कारण बनता है । (तम्) = उस सोम को (तुविष्वणि) = [तुवि much स्वन-शोर] बहुत शोर में, व्यर्थ की बातों में (अस्त्रेधन्) = हिंसित कर देते हैं। बहुत बोलना सोमरक्षण के अनुकूल नहीं। मौन सोमरक्षण में सहायक होता है। बहुत न बोलकर कर्म में लगे रहना ही सोमरक्षण का साधन है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम मस्तिष्क व शरीर दोनों को मानवहितकारी व प्रकाशमय बनाता है। ऐसे बनकर हम यज्ञों में प्रवृत्त होते हैं। बहुत बोलना व कर्म न करना, सोमरक्षण का विरोधी है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सः) स परमात्मा (वां) युवां ज्ञानयोगिकर्मयोगिनौ (यज्ञेषु) क्रतुषु (जनिष्ट) शुभफलान्युत्पाद्य तैर्योजयति अतः (मानवी) हे उभयथा विद्वांसौ ! मनुष्यसृष्टिवर्तिनौ ! तथा च (रोदसी) द्यावापृथिव्योर्मध्ये (देवी) हे दिव्यगुणवत्यः स्त्रियः ! (इन्दुः) प्रकाशमयः (देवः) दिव्यगुणसम्पन्नः परमात्मा (गिरिष्ठाः, तं) सर्वब्रह्माण्डेषु व्याप्तो यस्तं (तुविष्वणि) ज्ञानयज्ञेषु (अस्रेधन्) साक्षात्कुरुत ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - That divine spirit of beauty and perfection, brilliant and generous, resounding over heaven and earth, vested in cloud showers and mountain tops, loving, gracious and deeply human at heart, O men and women of the earth, create in your yajnas and realise in life.