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नू न॒स्त्वं र॑थि॒रो दे॑व सोम॒ परि॑ स्रव च॒म्वो॑: पू॒यमा॑नः । अ॒प्सु स्वादि॑ष्ठो॒ मधु॑माँ ऋ॒तावा॑ दे॒वो न यः स॑वि॒ता स॒त्यम॑न्मा ॥

English Transliteration

nū nas tvaṁ rathiro deva soma pari srava camvoḥ pūyamānaḥ | apsu svādiṣṭho madhumām̐ ṛtāvā devo na yaḥ savitā satyamanmā ||

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Pad Path

नु । नः॒ । त्वम् । र॒थि॒रः । दे॒व॒ । सो॒म॒ । परि॑ । स्र॒व॒ । च॒म्वोः॑ । पू॒यमा॑नः । अ॒प्ऽसु । स्वादि॑ष्ठः । मधु॑ऽमान् । ऋ॒तऽवा॑ । दे॒वः । न । यः । स॒वि॒ता । स॒त्यऽम॑न्मा ॥ ९.९७.४८

Rigveda » Mandal:9» Sukta:97» Mantra:48 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:20» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:48


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे सर्वोत्पादक ! (देव) दिव्यस्वरूप परमात्मन् ! (त्वम्) तुम (रथिरः) बलस्वरूप हो, (चम्वोः) सब भुवनों को (पूयमानः) पवित्र करते हुए (अप्सु) जलों में (मधुमान्) मीठा (स्वादिष्ठ) स्वादुरस (ऋतावा) वितीर्ण करते हुए (देवः) दिव्यशक्ति के (न) समान (नु) शीघ्र (नः) हमारे लिये (सत्यमन्मा) सत्यस्वरूप आप हमारे अन्तःकरण में आकर (परिस्रव) विराजमान हो ॥४८॥
Connotation: - इस मन्त्र में परमात्मा से स्व-स्वामिभाव की प्रार्थना की गई है अथवा यों कहो कि प्रेर्य और प्रेरकभाव से परमात्मा की उपासना की गई है ॥४८॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मधुमान् ऋतावा

Word-Meaning: - हे (देव) = प्रकाशमय (सोम) = वीर्य (नु) = अब (नः) = हमारे लिये (त्वम्) = तू (रथिरः) = शरीररथ को उत्तम बनानेवाला होता हुआ (परिस्रव) = शरीर में चारों ओर गतिवाला हो। तू (चम्वो) = इन द्यावापृथिवी के निमित्त मस्तिष्क व शरीर के लिये, (पूयमानः) = पवित्र किया जाता हुआ हो । तेरी पवित्रता पर ही मस्तिष्क की ज्ञान दीप्ति व शरीर की शक्ति निर्भर करती है । यह सोम अप्सु (स्वादिष्ठः) = कर्मों में अधिक से अधिक आनन्द के देनेवाला है । सोमरक्षण ही क्रियाशील बन पाता है। (मधुमान्) = यह सोम जीवन में माधुर्य का संचार करनेवाला व (ऋतावा) = ऋत का, यज्ञादि उत्तम कर्मों का रक्षक है । सोम वह है (यः) = जो कि (देवः न) = उस प्रकाशमय प्रभु के समान हमें (सविता) = कर्मों में प्रेरित करनेवाला है । (सत्यमन्मा) = सत्यज्ञान वाला है। सोमरक्षण से ही बुद्धि की तीव्रता होकर सत्य ज्ञान प्राप्त होता है।
Connotation: - भावार्थ- सोम सुरक्षित होकर मस्तिष्क व शरीर को सुन्दर बनाता है। 'क्रियाशीलता, माधुर्य व ऋत' को प्राप्त कराता है। सत्य ज्ञान की प्राप्ति का साधन बनता है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे सर्वोत्पादक ! (देव) दिव्यस्वरूप परमात्मन् ! (त्वं) भवान् (रथिरः) बलस्वरूपोऽस्ति (चम्वोः) भुवनानि (पूयमानः) पावयन् (अप्सु) जलेषु (मधुमान्) मधुरं (स्वादिष्ठः) स्वादुतमं रसं (ऋतावा) वितरन् (देवः, न) दिव्यशक्तिरिव (नु) शीघ्रम् (नः) अस्मभ्यं (सत्यमन्मा) सत्यस्वरूपो भवन् भवान् (परि, स्रव) मदन्तःकरणे विराजताम् ॥४८॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Verily to us for our vision and experience, you, O master of the cosmic chariot, refulgent Soma, flow on in the mighty forms of existence both physical and psychic. Flow on, pure, purifying and sanctifying in the dynamics of nature, flow into our actions, thoughts and words. Flow on, sweetest spirit, bearing honeyed joys of life, the very spirit of truth and eternal law, you who are self-refulgent and generous like the life-giving sun, sole lord of truth and laws of constant mutability at heart.