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ए॒ष स्य ते॑ पवत इन्द्र॒ सोम॑श्च॒मूषु॒ धीर॑ उश॒ते तव॑स्वान् । स्व॑र्चक्षा रथि॒रः स॒त्यशु॑ष्म॒: कामो॒ न यो दे॑वय॒तामस॑र्जि ॥

English Transliteration

eṣa sya te pavata indra somaś camūṣu dhīra uśate tavasvān | svarcakṣā rathiraḥ satyaśuṣmaḥ kāmo na yo devayatām asarji ||

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Pad Path

ए॒षः । स्यः । ते॒ । प॒व॒ते॒ । इ॒न्द्र॒ । सोमः॑ । च॒मूषु॑ । धीरः॑ । उ॒श॒ते । तव॑स्वान् । स्वः॑ऽचक्षाः । र॒थि॒रः । स॒त्यऽशु॑ष्मः । कामः॑ । न । यः । दे॒व॒ऽय॒ताम् । अस॑र्जि ॥ ९.९७.४६

Rigveda » Mandal:9» Sukta:97» Mantra:46 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:20» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:46


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे कर्मयोगिन् ! (ते) तुम्हारे लिये (एषः, स्यः) वह उक्त परमात्मा (पवते) पवित्र करता है, (यः) जो (सोमः) सौम्यस्वभाव (चमूषु) सब प्रकार के बलों में (धीरः) धीर है और (उशते) कान्तिवाले कर्मयोगी के लिये (तवस्वान्) बलस्वरूप है, (स्वर्चक्षाः) सुख का उपदेष्टा (रथिरः) गतिस्वरूप (सत्यशुष्मः) सत्यरूप बलवाला और (देवयताम्) देवभाव की इच्छा करनेवालों के लिये जो (कामः) कामना के समान (असर्जि) उपदेश किया गया ॥४६॥
Connotation: - परमात्मा ही सब कामनाओं का मूल है। जो लोग ऐश्वर्य्य की कामनावाले हैं, उनको चाहिये कि वे कर्मयोगी और उद्योगी बनकर उससे ऐश्वर्य्यों की प्राप्ति के अभिलाषी बनें ॥४६॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धीरः तवस्वान्

Word-Meaning: - हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! (एषः) = यह (स्यः) = वह प्रसिद्ध वे (सोमः) = आपको सोम [वीर्य] (चमूषु) = शरीरपात्रों में (पवते) = प्राप्त होता है । (उशते) = सोमरक्षण की कामना वाले मेरे लिये [कामयमानाय ] यह सोम (धीरः) = [धियम् ईरयति] ज्ञान को प्रेरित करनेवाला है तथा (तवस्वान्) = प्रशस्त बल वाला है । यह सोम (स्वर्चक्षा) = प्रकाश को दिखानेवाला है, (रथिर:) = शरीर रूप उत्तम रथ वाला है, (सत्यशुष्मः) = सत्य के बल वाला है। मस्तिष्क में ज्ञान के प्रकाश को, मन में सत्य को प्राप्त कराता हुआ यह सोम शरीररथ को उत्तम बनाता है। यह सोम वह है (यः) = जो (देवयतां) = दिव्यगुणों को अपनाने की कामना वालों का (कामः न) = सब इच्छाओं को पूर्ण करनेवाले के समान असर्जि उत्पन्न किया गया है। [कामः कामदः इव ] ।
Connotation: - भावार्थ- सोम 'ज्ञान व शक्ति' को प्राप्त कराता है। सब कामनाओं का यह पूर्ण करनेवाला है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे कर्मयोगिन् ! (ते) त्वाम् (एषः, स्यः) अयं परमात्मा (पवते) पवित्रयति (यः, सोमः) यः परमात्मा (चमूषु) सर्वविधबलेषु (धीरः) स्थिरः (उशते) कामयमानाय कर्मयोगिने च (तवस्वान्) बलस्वरूपः (स्वर्चक्षाः) सुखोपदेष्टा (रथिरः) गतिशीलः (सत्यशुष्मः) सत्यपराक्रमः (देवयतां) देवत्वमिच्छता (कामः) कामनेव (असर्जि) उपदिष्टः ॥४६॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Hey Indra, dear soul, it is that Soma, Spirit of divinity which flows free and purifying for you, the human lover that cherish the Spirit. Pervasive in the holy hearts and indeed in all forms of existence, constant, almighty, watching, radiating and revealing, itself the light of heaven, master of the cosmic chariot, inviolably true in its potential, it flows free like the love as well as the lover of the celebrants of divinity.