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ग्र॒न्थिं न वि ष्य॑ ग्रथि॒तं पु॑ना॒न ऋ॒जुं च॑ गा॒तुं वृ॑जि॒नं च॑ सोम । अत्यो॒ न क्र॑दो॒ हरि॒रा सृ॑जा॒नो मर्यो॑ देव धन्व प॒स्त्या॑वान् ॥

English Transliteration

granthiṁ na vi ṣya grathitam punāna ṛjuṁ ca gātuṁ vṛjinaṁ ca soma | atyo na krado harir ā sṛjāno maryo deva dhanva pastyāvān ||

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Pad Path

ग्र॒न्थिम् । न । वि । स्य॒ । ग्र॒थि॒तम् । पु॒ना॒नः । ऋ॒जुम् । च॒ । गा॒तुम् । वृ॒जि॒नम् । च॒ । सो॒म॒ । अत्यः॑ । न । क्र॒दः॒ । हरिः॑ । आ । सृ॒जा॒नः । मर्यः॑ । दे॒व॒ । ध॒न्व॒ । प॒स्त्य॑ऽवान् ॥ ९.९७.१८

Rigveda » Mandal:9» Sukta:97» Mantra:18 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:14» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:18


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (ग्रथितम्) बुद्ध पुरुषों के (पुनानः) मुक्तिदाता आप (नः) हमारे (ग्रन्थिं न) गाँठ के समान बन्धन को (विष्य) मोचन करें (च) और (गातुम्) हमारे मार्ग को (ऋजुम्) सरल करें। (सोम) हे परमात्मन् ! (च) तथा (वृजिनम्) हमको बल प्रदान करें, (अत्यो न) विद्युत् की शक्ति के समान (क्रदः) आप शब्दायमान हैं, (आ, सृजानः) उत्पत्तिकाल में सबके स्रष्टा हैं और प्रलयकाल में (हरिः) सबके हरणकर्त्ता हैं। (देव) हे देव ! (पस्त्यवान्) अन्यायकारी शत्रुओं के (मर्यः) आप नाशक हैं, (धन्व) आप हमारे अन्तःकरणों को शुद्ध करें ॥१८॥
Connotation: - परमात्मा स्वभाव से न्यायकारी है। वह आप उपासकों के अन्तःकरण को शुद्धि प्रदान करता है और अनाचारियों को रुद्ररूप से विनाश करता हुआ इस संसार में धर्म और नीति को स्थापन करता है ॥१८॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

पस्त्यावान्

Word-Meaning: - हे सोम ! (पुनानः) = पवित्र किया जाता हुआ तू वासनाओं के उबाल से मलिन न होने दिया जाता हुआ तू (ग्रथितं) = विषयों से जकड़े हुए मुझको (विष्य) = इन बन्धनों से मुक्त कर । (ग्रन्थिं न) = जैसे कि एक गाँठ को खोल देते हैं, इस प्रकार तू मेरी हृदयग्रन्थियों को भिन्न करनेवाला हो। (च) = और हृदयग्रन्थियों को नष्ट करके तू मुझे (ऋतुं गातुम्) = सरल मार्ग (च) = तथा (वृजिनम्) = बल को प्राप्त करा । मैं विषयों से ऊपर उठकर सबल बनकर सरल मार्ग से जीवनयात्रा में आगे बढ़ें। (आसृजान:) = शरीर में चारों ओर (सृष्ट) = प्रेरित होता हुआ तू (अत्यः न) = सततगामी अश्व के समाने क्रियाशील होकर (क्रदः) = उस प्रभु के नामों का उच्चारण कर । सोमरक्षण से मेरी प्रवृत्ति प्रभुस्मरण की बने। (हरिः) = तू सब रोगों का हरण करनेवाला हो, (मर्यः) = शत्रुओं का मारनेवाला हो। इस प्रकार (पस्त्यावान्) = इस शरीररूप गृह को प्रशस्त बनाता हुआ तू देव हे प्रकाशमय सोम! (धन्व) = मुझे प्राप्त हो ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम हृदयग्रन्थियों को भिन्न करे, सरलता व सबलता को प्राप्त कराये, प्रभु की ओर हमें झुकाये, रोगों को हरें, काम-क्रोध आदि को मारे, इस प्रकार शरीर गृह को उत्तम बनाये ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (ग्रथितं) बद्धपुरुषाणां (पुनानः) मुक्तिदो भवान् (नः) अस्माकं (ग्रन्थिं न) बन्धनमिव (वि स्य) मोचयतु (च) तथा (गातुं) मन्मार्गं (ऋजुं) सुगमं करोतु (सोम) हे सौम्यस्वभाव ! (वृजिनं, च) बलं च सम्पादयतु (अत्यः न) विद्युच्छक्तिरिव (क्रदः) शब्दकारी भवान् (आ, सृजानः) उत्पत्तिकाले सर्वस्रष्टा (हरिः) प्रलये च हरणकर्तास्ति (देव) हे भगवन् ! (पस्त्यवान्) अन्यायिशत्रूणां (मर्यः) नाशकः (धन्व) मदन्तःकरणं शोधयतु ॥१८॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, pure, purifying and refulgent divinity, liberate the man in chains, breaking the bond as you untie a tough knot. Make the paths of life simple and straight, let the strength be natural and sincere, free from guile. Spirit of divinity, you roar as thunder, you are saviour and sustainer, creator and maker of the mortal humanity, and you are the sole master of the universe, your home.