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सम॑स्य॒ हरिं॒ हर॑यो मृजन्त्यश्वह॒यैरनि॑शितं॒ नमो॑भिः । आ ति॑ष्ठति॒ रथ॒मिन्द्र॑स्य॒ सखा॑ वि॒द्वाँ ए॑ना सुम॒तिं या॒त्यच्छ॑ ॥

English Transliteration

sam asya hariṁ harayo mṛjanty aśvahayair aniśitaṁ namobhiḥ | ā tiṣṭhati ratham indrasya sakhā vidvām̐ enā sumatiṁ yāty accha ||

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Pad Path

सम् । अ॒स्य॒ । हरि॑म् । हर॑यः । मृ॒ज॒न्ति॒ । अ॒श्व॒ऽह॒यैः । अनि॑ऽशितम् । नमः॑ऽभिः । आ । ति॒ष्ठ॒ति॒ । रथ॑म् । इन्द्र॑स्य । सखा॑ । वि॒द्वान् । ए॒न॒ । सु॒ऽम॒तिम् । या॒ति॒ । अच्छ॑ ॥ ९.९६.२

Rigveda » Mandal:9» Sukta:96» Mantra:2 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:6» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:5» Mantra:2


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अस्य हरिम्) उस परमात्मा की हरणशील शक्ति को (हरयः) ज्ञान की किरणें (मृजन्ति) प्रदीप्त करती हैं और (अश्वहयैः) विद्युदादि शक्तियों के समान (अनिशितम्) असंस्कृत को भी (नमोभिः) सत्कार द्वारा संस्कृत करता हुआ (आतिष्ठति) आकर विराजमान होता है। (रथम्) उक्त गतिस्वरूप परमात्मा को (इन्द्रस्य) कर्मयोगी का (सखा) मित्र (विद्वान्) मेधावी पुरुष (एना) उक्त रास्ते से (सुमतिम्) सुन्दर मार्ग को (अच्छ याति) भली-भाँति प्राप्त होता है ॥२॥
Connotation: - जो लोग नम्रभाव से परमात्मा की उपासना करते हैं, वे असंस्कृत होकर भी शुद्ध हो जाते हैं अर्थात् उनकी शुद्धि का कारण एकमात्र परमात्मोपासनरूपी संस्कार ही है, कोई अन्य संस्कार नहीं ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सुमति की प्राप्ति

Word-Meaning: - (अस्य) = इस जीव के (हरिम्) = दुःखहर्ता सोम को (हरयः) = इन्द्रियाश्व ही (समृजन्ति) = शुद्ध करते हैं। जो सोम (अश्वहयैः) = इन्द्रियाश्वों की इधर-उधर गति से (अनिशितम्) = तेज व उबाल वाला नहीं कर दिया गया । वह सोम (नमोभिः) = प्रभु नमनों के द्वारा (रथम् आतिष्ठति) = इस शरीर रथ में ही चारों ओर स्थित होता है। यदि इन्द्रियाँ विषयों में इधर-उधर नहीं भटकती और हम प्रभु नमन में प्रवृत्त होते हैं, तो यह सोम शरीर में सुरक्षित रहता है । (इन्द्रस्य सखा) = उस समय यह सोम इस जितेन्द्रिय पुरुष का मित्र होता है। विद्वान् ज्ञानी पुरुष (एना) = इस सोम के द्वारा (सुमतिं अच्छ) = कल्याणी मति की ओर (याति) = जाता है सोमरक्षण से शुभमति को प्राप्त करता है ।
Connotation: - भावार्थ- इन्द्रियाँ जब विषयों में नहीं जाती तो प्रभु नमन करती हुईं सोम का रक्षण करती करता हैं। यह सोम सुरक्षित हुआ हुआ सुमति का प्रदान है

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अस्य, हरिं) अस्य परमात्मनो हरणशीलशक्तीः (हरयः) ज्ञानकिरणाः (मृजन्ति) प्रदीपयन्ति तथा (अश्वहयैः) विद्युदादि शक्तय इव (अनिशितं) असंस्कृतमपि (नमोभिः) सत्कारद्वारेण संस्कृतं कुर्वन् (आ, तिष्ठति) आगत्य विराजते (रथं) उक्तगतिशीलपरमात्मानं (इन्द्रस्य) कर्मयोगिनः (सखा) मित्रं (विद्वान्) मेधावी जनः (एन) उक्तमार्गेण (सुमतिं) सुमार्गं (अच्छ, याति) सम्यक् प्राप्नोति ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Active and self-sacrificing people of society with fast driving forces and incessant inputs of men, materials and committed loyalties empower the chariot of this leader of humanity. Also, the ruling Indra’s friend, a sagely scholar, comes up and joins the chariot, and with him Soma goes forward well with proper understanding, principles and policies.