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शिशुं॑ जज्ञा॒नं ह॑र्य॒तं मृ॑जन्ति शु॒म्भन्ति॒ वह्निं॑ म॒रुतो॑ ग॒णेन॑ । क॒विर्गी॒र्भिः काव्ये॑ना क॒विः सन्त्सोम॑: प॒वित्र॒मत्ये॑ति॒ रेभ॑न् ॥

English Transliteration

śiśuṁ jajñānaṁ haryatam mṛjanti śumbhanti vahnim maruto gaṇena | kavir gīrbhiḥ kāvyenā kaviḥ san somaḥ pavitram aty eti rebhan ||

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Pad Path

शिशु॑म् । ज॒ज्ञा॒नम् । ह॒र्य॒तम् । मृ॒ज॒न्ति॒ । शु॒म्भन्ति॑ । वह्नि॑म् । म॒रुतः॑ । ग॒णेन॑ । क॒विः । गीः॒ऽभिः । काव्ये॑न । क॒विः । सन् । सोमः॑ । प॒वित्र॑म् । अति॑ । ए॒ति॒ । रेभ॑न् ॥ ९.९६.१७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:96» Mantra:17 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:9» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:5» Mantra:17


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (शिशुम्) “श्यति सूक्ष्मं करोति प्रलयकाले जगदिति शिशुः परमात्मा” उस परमात्मा को (जज्ञानम्) जो सदा प्रगट है, (हर्य्यतम्) जो अन्यन्त कमनीय है, उसको उपासक लोग (मृजन्ति) बुद्धिविषय करते हैं और (शुम्भन्ति) उसकी स्तुति द्वारा उसके गुणों का वर्णन करते हैं और (मरुतः) विद्वान् लोग (वह्निम्) उस गतिशील परमात्मा का (गणेन) गुणों के गणों द्वारा वर्णन करते हैं और (कविः) कवि लोग (गीर्भिः) वाणी द्वारा और (काव्येन) कवित्व से (कविः) उस कवि की स्तुति करते हैं। (सोमः) सोमस्वरूप (पवित्रम्) पवित्र वह परमात्मा कारणावस्था में अतिसूक्ष्म प्रकृति को (रेभन्, सन्) गर्जता हुआ (अत्येति) अतिक्रमण करता है ॥१७॥
Connotation: - परमात्मा के अनन्त सामर्थ्य से यह ब्रह्माण्ड सूक्ष्म से स्थूलावस्था को प्राप्त होता है और उसी से प्रलयावस्था को प्राप्त हो जाता है ॥१७॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'शिशु-जज्ञान- हर्यत - वह्नि' सोम

Word-Meaning: - (शिशुम्) = बुद्धि को सूक्ष्म बनानेवाले [शो तनू करणे], (जज्ञानम्) = शक्तियों का प्रादुर्भाव करनेवाले, (हर्यतम्) = कमनीय इस सोम को प्राण मृजन्ति शुद्ध करते हैं । इस (वह्निम्) = हमें लक्ष्य स्थान पर पहुँचानेवाले सोम को (मरुतः) = प्राण (गणेन) = अपने समूह से (शुम्भन्ति) = शोभित करते हैं । यह सोम (कविः) = क्रान्तदर्शी - सूक्ष्म बुद्धि वाला है । (गीर्भिः) = इन ज्ञानवाणियों के द्वारा तथा (काव्येन) = वेदवाणीरूप काव्य के द्वारा (कविः सन्) = क्रान्तदर्शी होता हुआ यह (सोमः) = सोम (रेभन्) = प्रभुस्तवन करता हुआ (पवित्रम्) = पवित्र हृदय वाले पुरुष को (अति एति) = अतिशयेन प्राप्त होता है ।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम हमारी बुद्धियों को तीव्र करता है, हमारे सद्गुणों का विकास करता है, कमनीयता का कारण होता है, लक्ष्यस्थान पर पहुँचाता है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (जज्ञानं) शश्वत्प्रकाशमानं (शिशुं) परमात्मानं (हर्यतम्) यो हि नितान्तकमनीयस्तं (मृजन्ति) उपासका बुद्धिविषयं कुर्वन्ति (शुम्भन्ति) स्तुतिभिर्गुणांश्च वर्णयन्ति। (मरुतः) विद्वांसः (वह्निं) तं परमात्मानं (गणेन) गुणसमूहेन वर्णयन्ति (कविः) कवयश्च (गीर्भिः) वाग्भिः (काव्येन) कवितया च (कविः) तं कविं स्तुवन्ति (सोमः) परमात्मा (पवित्रं) पवित्रगुणः (रेभन्, सन्) शब्दं कुर्वन् सन् कारणावस्थायामतिसूक्ष्मप्रकृतिम् (अति, एति) अतिक्रामति ॥१७॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Dedicated celebrants perceive the presence beatific, manifested and expansive in the experience of nature around, cleanse it like a new bom baby, discover and distil it in the spirit and adore it in song. As winds in storm raise a spark to blazing fire, bands of admirers celebrate it in its native glory. Omnipresent all-watching sagely divine, exalted to its omniscience and omnipotence in human consciousness by the music of the poetic voice, Soma, divine presence, radiates into the pure human heart loud and bold and transcends the soul to infinite space.