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नू नो॑ र॒यिमुप॑ मास्व नृ॒वन्तं॑ पुना॒नो वा॒ताप्यं॑ वि॒श्वश्च॑न्द्रम् । प्र व॑न्दि॒तुरि॑न्दो ता॒र्यायु॑: प्रा॒तर्म॒क्षू धि॒याव॑सुर्जगम्यात् ॥

English Transliteration

nū no rayim upa māsva nṛvantam punāno vātāpyaṁ viśvaścandram | pra vanditur indo tāry āyuḥ prātar makṣū dhiyāvasur jagamyāt ||

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Pad Path

नु । नः॒ । र॒यिम् । उप॑ । मा॒स्व॒ । नृ॒ऽवन्त॑म् । पु॒ना॒नः । वा॒ताप्य॑म् । वि॒श्वऽच॑न्द्रम् । प्र । व॒न्दि॒तुः । इ॒न्दो॒ इति॑ । ता॒रि॒ । आयुः॑ । प्रा॒तः । म॒क्षु । धि॒याऽव॑सुः । ज॒ग॒म्या॒त् ॥ ९.९३.५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:93» Mantra:5 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:3» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:5» Mantra:5


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (नु) निश्चय करके (नः) हमारे लिये (रयिं) ऐश्वर्य (उपमास्व) आप दें और (नृवन्तं) लोकसंग्रहवाले मुझको (पुनानः) पवित्र करते हुए आप (वाताप्यं) प्रेमरूप (विश्वचन्द्रं) जो विश्व को प्रसन्न करनेवाला ऐश्वर्य्य है, वह मुझे दें और (वन्दितुः) इस उपासक की आपके द्वारा (प्रतारि) वृद्धि हो और (आयुः) आयु हो (धियावसु) सम्पूर्ण ज्ञानों के निधि जो आप हैं, (प्रातः) उपासनाकाल में (मक्षु) शीघ्र (जगम्यात्) आकर हमारी वृद्धि में आरूढ़ हों ॥५॥
Connotation: - इस मन्त्र में प्रकाशस्वरूप परमात्मा से ऐश्वर्य्य की प्रार्थना की गई है ॥५॥ यह ९३ वाँ सूक्त और तीसरा वर्ग समाप्त हुआ ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धियावसु

Word-Meaning: - हे सोम ! (पुनानः) = पवित्र किया जाता हुआ तू (नः) = हमारे लिये (नू) = निश्चय से (नृवन्तम्) = प्रशस्त मनुष्योंवाले (वाताप्यम्) = [वातेन आप्यम्, वा गतौ] = क्रियाशीलता से प्राप्त होनेवाले, (विश्वश्चन्द्रम्) = सबके आह्लादक (रयिम्) = धन को उपमास्व दे । सोमरक्षक काम से उसी धन का अर्जन करते हैं जो सर्वहितकर होता है । हे (इन्दो) = सोम ! (वन्दितुः) = प्रभु के स्तोता की (आयुः प्रतारि) = आयु को तू बढ़ानेवाला हो। (प्रातः) = प्रातः काल ही (मक्षू) = शीघ्र (धियावसुः) = बुद्धिपूर्वक कर्मों द्वारा वसुओं को प्राप्त करानेवाला यह सोम (जगम्यात्) = हमें प्राप्त हो ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से हम प्रकृष्ट धन को व दीर्घजीवन को प्राप्त करें । कण-कण करके बुद्धि का संचय करनेवाला 'कण्व' (मेधावी) अगले सूक्त का ऋषि है। यह सोम के लिये कहता है-
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (नु) निश्चयं (नः) अस्मभ्यं (रयिं) ऐश्वर्यं (उप, मास्व) देहि तथा (नृवन्तं) लोकसङ्ग्रहवन्तं मां (पुनानः) पावयन् (वाताप्यं) प्रेमरूपं (विश्वचन्द्रं) विश्वप्रसादकमैश्वर्यं मह्यं देहि, तथा (वन्दितुः) अस्योपासकस्य भवद्द्वारा (प्र, तारि) वृद्धिर्भवतु (आयुः) आयुश्च भवतु (धियावसुः) अखिलज्ञाननिधिर्भवान् (प्रातः) उपासनाकाले (मक्षु) शीघ्रं (जगम्यात्) आगत्य मद्बुद्धौ रूढो भवतु ॥५॥ इति त्रिनवतितमं सूक्तं तृतीयो वर्गश्च समाप्तः ॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indu, divine spirit of beauty, brilliance and benevolence, pure and purifying presence, give us the wealth and power of leading lights and noble progeny worthy of the brave, blest with universal beauty and grace flowing in at the spiral speed of winds. O Spirit of life, bless the celebrant with good health and long age, and in the morning may the divine light and spirit of intelligence and will radiate to us.