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इन्द्रा॑य सोम॒ सुषु॑त॒: परि॑ स्र॒वापामी॑वा भवतु॒ रक्ष॑सा स॒ह । मा ते॒ रस॑स्य मत्सत द्वया॒विनो॒ द्रवि॑णस्वन्त इ॒ह स॒न्त्विन्द॑वः ॥

English Transliteration

indrāya soma suṣutaḥ pari sravāpāmīvā bhavatu rakṣasā saha | mā te rasasya matsata dvayāvino draviṇasvanta iha santv indavaḥ ||

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Pad Path

इन्द्रा॑य । सो॒म॒ । सुऽसु॑तः । परि॑ । स्र॒व॒ । अप॑ । अमी॑वा । भ॒व॒तु॒ । रक्ष॑सा । स॒ह । मा । ते॒ । रस॑स्य । म॒त्स॒त॒ । द्व॒या॒विनः॑ । द्रवि॑णस्वन्तः । इ॒ह । स॒न्तु॒ । इन्द॑वः ॥ ९.८५.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:85» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:3» Varga:10» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:4» Mantra:1


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दवः) कर्म्मयोगी इस संसार में (द्रविणस्वन्तः) ऐश्वर्यवाले होकर (इह) इस यज्ञ में (सन्तु) विराजमान हों और (द्वयाविनः) झूठ-सच का विवेक न करनेवाले मायावी पुरुष (ते रसस्य) तुम्हारे आनन्द का (मा, मत्सत) मत लाभ उठावें। (सोम) हे जगत्कर्त्ता परमात्मन् ! (इन्द्राय) कर्म्मयोगी के लिये (सुषुतः) साक्षात्कार को प्राप्त हुए आप (परिस्रव) ज्ञान द्वारा उसके हृदय में आकर विराजमान होवो और (रक्षसा, सह) राक्षसों के द्वारा किये हुए कर्म्मयोगियों के रोगादिक (अप, भवन्तु) दूर हों ॥१॥
Connotation: - जो लोग सत्यासत्य में विवेक नहीं कर सकते और असत्य को त्यागकर दृढ़तापूर्वक सत्य का ग्रहण नहीं कर सकते, वे सदैव सत्यामृत के सागर में गोते खाते रहते हैं, इसलिये मनुष्य को चाहिये कि वह सत्यासत्य का विवेक करके सत्यग्राही बने ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अष अमीवा भवतु रक्षसासर

Word-Meaning: - [१] हे सोम वीर्यशक्ते (सुषुतः) = ओषधियों, वनस्पतियों के भोजन से पैदा हुआ हुआ तू (इन्द्रायः) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (परिस्त्रव) = शरीर में चारों ओर गतिवाला हो । (रक्षसा सह) = सब आसुरी भावों के साथ (अमीवा) = रोग (अपभवतु) = दूर हो। सोम से रोग व राक्षसीभाव विनष्ट हो जाते हैं । [२] (द्वयाविनः) = अन्दर व बाहिर भिन्न-भिन्न वृत्तिवाले चालाकी व छलादि से भरे व्यक्ति (ते रसस्य) = तेरे रस का (मा मत्सत) = आनन्द प्राप्त करनेवाले न हों। हमारे लिये तो (इन्दवः) = ये सोमकण (इह) = इस शरीर में (द्रविणस्वन्तः) = सब द्रविणों को प्राप्त करानेवाले (सन्तु) = हों । अर्थात् सोमरक्षण से अन्नमय आदि सब कोशों का ऐश्वर्य परिपूर्ण बनें ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से सब रोग व राक्षसी भाव दूर हों । सब कोशों का ऐश्वर्य प्राप्त हो ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दवः) कर्मयोगिनोऽस्मिन् संसारे (द्रविणस्वन्तः) ऐश्वर्यवन्तो भूत्वा (इह) अस्मिन्नध्वरे (सन्तु) विराजन्ताम्। अथ च (द्वयाविनः) सत्यासत्यविवेकिनो मायाविपुरुषाः (ते, रसस्य) भवदीयानन्दस्य (मा, मत्सत) लाभं नाप्नुवन्तु। (सोम) हे जगत्स्रष्टः ! (इन्द्राय) कर्मयोगिने (सुषुतः) साक्षाद्भूतो भवान् (परि, स्रव) ज्ञानद्वारा तदीयहृदयमागत्य विराजताम्। अथ च (रक्षसा, सह) राक्षसैः कृताः कर्मयोगिनां (अमीवा) रोगाः (अप, भवन्तु) दूरीभवन्तु ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, divine joy of life, distilled and realised in meditation, flow for the delight of the soul. Let adversities and ailments be far off, give us freedom from negativities, contradictions, adversities and violence. Double dealers would not have the joy of that experience and freedom. May all streams of Soma be abundant in wealth, honour and excellence.