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आ यस्त॒स्थौ भुव॑ना॒न्यम॑र्त्यो॒ विश्वा॑नि॒ सोम॒: परि॒ तान्य॑र्षति । कृ॒ण्वन्त्सं॒चृतं॑ वि॒चृत॑म॒भिष्ट॑य॒ इन्दु॑: सिषक्त्यु॒षसं॒ न सूर्य॑: ॥

English Transliteration

ā yas tasthau bhuvanāny amartyo viśvāni somaḥ pari tāny arṣati | kṛṇvan saṁcṛtaṁ vicṛtam abhiṣṭaya induḥ siṣakty uṣasaṁ na sūryaḥ ||

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Pad Path

आ । यः । त॒स्थौ । भुव॑नानि । अम॑र्त्यः । विश्वा॑नि । सोमः॑ । परि॑ । तानि॑ । अ॒र्ष॒ति॒ । कृ॒ण्वन् । स॒म्ऽचृत॑म् । वि॒ऽचृत॑म् । अ॒भिष्ट॑ये । इन्दुः॑ । सि॒स॒क्ति॒ । उ॒षस॑म् । न । सूर्यः॑ ॥ ९.८४.२

Rigveda » Mandal:9» Sukta:84» Mantra:2 | Ashtak:7» Adhyay:3» Varga:9» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:4» Mantra:2


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दुः) प्रकाशस्वरूप परमात्मा (सूर्य्यः) जैसे सूर्य्य (उषसं न) उषा को संयुक्त करता है, उसके समान (सिषक्ति) संयुक्त करता है और (अभिष्टये) ऐश्वर्य के लिये (सञ्चृतं) प्रकाशों से संयुक्त और (विचृतं) अज्ञानों से रहित (कृण्वन्) करता हुआ (आतस्थौ) आकर हमारे हृदय में विराजमान हो। (यः) जो परमात्मा (अमर्त्यः) अविनाशी है और (विश्वानि, भुवनानि) सब लोक-लोकान्तरों के (परि, अर्षति) चारों ओर व्यापक है, वह (सोमः) सोमगुणसम्पन्न परमात्मा हमारी रक्षा करे ॥२॥
Connotation: - इस मन्त्र में परमात्मा ने ज्ञानी-विज्ञानी लोगों को सूर्य्य की प्रभा के समान वर्णन किया। तात्पर्य यह है कि ज्ञान-विज्ञान द्वारा ही पुरुष तेजस्वी और सूर्य्य के समान प्रभाकर बन सकता है, अन्यथा नहीं ॥२॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'संचृत व विवृत को करता हुआ' सोम.

Word-Meaning: - [१] (यः) = जो (सोमः) = सोम [वीर्यशक्ति] (भुवनानि आतस्थौ) = सब अगं प्रत्यंगों को अधिष्ठित करता है, वह सोम (अमर्त्यः) = हमें रोगों से मरने नहीं देता । वह सोम (तानि विश्वानि) = उन सब अंग-प्रत्यंगों में (परितान्यर्षति) = चारों ओर गतिवाला होता है। [२] सब अंगों में उपस्थित होकर (संचृतम्) = सब अच्छाइयों का संग्रन्थन [ connecting together] (कृण्वन्) = करता हुआ और इसी प्रकार (विचृतम्) = बुराइयों का विग्रन्थन करता हुआ (अभिष्टये) = हमारी इष्ट प्राप्ति के लिये होता है। यह (इन्दु) = सोम हमारा (सिषक्ति) = इस प्रकार सेवन करता है, (न) = जैसे कि (सूर्यः) = सूर्य (उषसम्) = उषा का । उषा को वस्तुतः सूर्य की प्रथम किरणों से ही दीप्ति प्राप्त होती है। हमारे जीवनों में यह सोम सूर्य के समान आता है, यह हमारे सारे अज्ञानान्धकार को दूर करनेवाला होता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमें रोगों से बचाता है। अच्छाइयों को हमारे साथ मिलाता है, बुराइयों को हमारे से दूर करता है। यह सोम हमारे जीवन के प्रकाश में सूर्य के समान उदित होता है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दुः) प्रकाशस्वरूपः परमेश्वरः (सूर्यः) भानुः (उषसं  न) उषा इव (सिषक्ति) संयुनक्ति। अथ च (अभिष्टये) ऐश्वर्याय (सञ्चृतम्) प्रकाशयुतं तथा (विचृतम्) अज्ञानशून्यं (कृण्वन्) कुर्वाणः (आतस्थौ) मम हृदयमागत्य विराजमानो भवतु (यः) यः परमेश्वरः (अमर्त्यः) मरणधर्मरहितोऽस्ति। तथा (विश्वानि भुवनानि) अखिललोकलोकान्तराणां (परि, अर्षति) चतुर्दिक्षु व्यापकोऽस्ति सः (सोमः) सौम्यस्वभावः परमात्मा अस्मान् रक्षतु ॥२॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Flow, purify and consecrate all, O Soma, immortal and eternal light, life and joy of existence, who pervade constant in all regions of the universe and vibrate therein, over, above and beyond, who, making one single unity into infinite variety (specifics in generalities, tensions in balance, centrifugals in centripetal motion, all differences and contrarieties moving in complementarity within the dynamics of a single, central, unmoved mind, all re-attaining to the same unity) for the common good and self-fulfilment of all, abide, the One in union with all like the sun with the dawns, illuminating all.