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प्र सोम॑स्य॒ पव॑मानस्यो॒र्मय॒ इन्द्र॑स्य यन्ति ज॒ठरं॑ सु॒पेश॑सः । द॒ध्ना यदी॒मुन्नी॑ता य॒शसा॒ गवां॑ दा॒नाय॒ शूर॑मु॒दम॑न्दिषुः सु॒ताः ॥

English Transliteration

pra somasya pavamānasyormaya indrasya yanti jaṭharaṁ supeśasaḥ | dadhnā yad īm unnītā yaśasā gavāṁ dānāya śūram udamandiṣuḥ sutāḥ ||

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Pad Path

प्र । सोम॑स्य । पव॑मानस्य । ऊ॒र्मयः॑ । इन्द्र॑स्य । य॒न्ति॒ । ज॒ठर॑म् । सु॒ऽपेश॑सः । द॒ध्ना । यत् । ई॒म् । उत्ऽनी॑ताः । य॒शसा॑ । गवा॑म् । दा॒नाय॑ । शूर॑म् । उ॒त्ऽअम॑न्दिषुः । सु॒ताः ॥ ९.८१.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:81» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:3» Varga:6» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:4» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब ईश्वर के ज्ञान के अधिकारियों का निरूपण करते हैं।

Word-Meaning: - (पवमानस्य) सबको पवित्र करनेवाले (सोमस्य) परमात्मा के ज्ञान की (ऊर्मयः) लहरें (इन्द्रस्य) ज्ञानयोगी के (जठरं) अन्तःकरण को (प्रयन्ति) प्राप्त होती हैं। जो लहरें (सुपेशसः) सुन्दर हैं और (गवां) इन्द्रियों के (दानाय) सुन्दर ज्ञान देने के लिये (दध्ना, यदीमुन्नीताः) सहायक संस्कार द्वारा (यशसा) बल से (उदमन्दिषुः) आनन्द में (सुताः) संस्कार किये हुए (शूरं) शूरवीर कर्म्मयोगी को प्रदीप्त करती हैं ॥१॥
Connotation: - परमात्मा के सदुपदेश ज्ञानयोगी को पवित्र करते हैं और उसके उत्साह को प्रतिदिन बढ़ाते हैं ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'यश-ज्ञान- आनन्द'

Word-Meaning: - [१] (पवमानस्य) = जीवन को पवित्र बनाते हुए (सोमस्य) = सोम की (अर्मयः) = तरंगें (इन्द्रस्य) = जितेन्द्रिय पुरुष के (जठरम्) = उदर को (प्रयन्ति) = प्रकर्षेण प्राप्त होती हैं । जितेन्द्रिय पुरुष के शरीर में सोम सुरक्षित रहता है । वहाँ ये सोम की तरंगे (सुपेक्षसः) = अंग-अन्यंग का सुन्दर निर्माण करती हैं । [२] (दध्ना) = [ धत्ते] चित्तवृत्ति का धारण करनेवाले पुरुष से (यत्) = जब (ईम्) = निश्चय से (उन्नीताः) = ये सोमकण शरीर में ऊर्ध्वगतिवाले होते हैं, तब ये सोमकण यशसा यश के साथ (गवां दानाय) = ज्ञान की वाणियों के देने के लिये होते हैं। ये सोम हमारे जीवन में (सुता:) = उत्पन्न हुए- हुए (शूरं) = शक्तिशाली पुरुष को (उद् मन्दिषुः) = खूब उत्कृष्ट आनन्द प्राप्त कराते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- जितेन्द्रियता व चित्तवृत्ति निरोध द्वारा रक्षित सोम [क] शरीर का उत्तम निर्माण करते हैं, [ख] जीवन को यशस्वी बनाते हैं, [ग] हमें ज्ञानदीप्त करते हैं, [घ] उत्कृष्ट आनन्द को प्राप्त कराते हैं ।
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ARYAMUNI

अथेश्वरज्ञानाधिकारिणो निरूप्यन्ते।

Word-Meaning: - (पवमानस्य) सर्वपावकस्य (सोमस्य) परमेश्वरज्ञानस्य (ऊर्मयः) वीचयः (इन्द्रस्य) ज्ञानयोगिनः (जठरम्) अन्तःकरणं (प्रयन्ति) प्राप्नुवन्ति। या वीचयः (सुपेशसः) सुन्दराः सन्ति। (गवाम्) इन्द्रियाणां (दानाय) सुज्ञानदानाय (दध्ना, यदीमुन्नीताः) सहायकसंस्कारद्वारा (यशसा) बलेन (उदमन्दिषुः) मोदे (सुताः) संस्कृताः (शूरम्) वीरं कर्मयोगिनं प्रदीप्तं कुर्वन्ति ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Charming vibrations of the presence and power of pure and purifying Soma, supreme spirit of light and peace, radiate to the heart core of Indra, lover of knowledge and light of divinity, when, seasoned and supplemented with experiences of senses and mind elevated through higher states of inversion and concentration in Dharma and Dhyana, they exhilarate the brave soul with strength and excellence and exhort it to divine love and total self-surrender.