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नृ॒चक्ष॑सं त्वा व॒यमिन्द्र॑पीतं स्व॒र्विद॑म् । भ॒क्षी॒महि॑ प्र॒जामिष॑म् ॥

English Transliteration

nṛcakṣasaṁ tvā vayam indrapītaṁ svarvidam | bhakṣīmahi prajām iṣam ||

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Pad Path

नृ॒ऽचक्ष॑सम् । त्वा॒ । व॒यम् । इन्द्र॑ऽपीतम् । स्वः॒ऽविद॑म् । भ॒क्षी॒महि॑ । प्र॒ऽजाम् । इष॑म् ॥ ९.८.९

Rigveda » Mandal:9» Sukta:8» Mantra:9 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:31» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:9


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (इन्द्रपीतम्) विद्वानों के द्वारा गृहीत किये गये (नृचक्षसम्) “नॄन् चष्टे पश्यति यः स नृचक्षास्तम् “सर्वद्रष्टा (स्वर्विदम्) सर्वज्ञ (त्वाम्) आपकी कृपा से (प्रजाम् इषम्) संसार के ऐश्वर्य को (भक्षीमहि) भोगें ॥९॥
Connotation: - जो लोग विद्वानों के सदुपदेश से सर्वज्ञत्वादि गुणयुक्त परमात्मा की उपासना करते हैं, वे संसार के आनन्द को भोगते हैं ॥९॥ यह आठवाँ सूक्त और इकतीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रकाश

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! (नृचक्षसम्) = मनुष्यों का ध्यान करनेवाले, उन्हें रोगादि के आक्रमण से बचानेवाले (त्वा) = तुझे (वयम्) = हम (भक्षीमहि) = अपने अन्दर ही खानेवाले [consume] विनियुक्त करनेवाले बनें। [२] उस तुझे हम अपने अन्दर ग्रहण करनेवाले हों, जो तू (इन्द्रपीतम्) = जितेन्द्रिय पुरुष से पीया जाता है, जितेन्द्रिय पुरुष ही तुझे अपने अन्दर व्याप्त कर पाता है । (स्वर्विदम्) = जो तू प्रकाश को प्राप्त करानेवाला है। तू (प्रजाम्) शक्तियों के प्रकृष्ट प्रादुर्भाव को करनेवाला है तथा (इषम्) = [इष प्रेरणे] उत्तम प्रेरणा को प्राप्त कराता है । सोमरक्षण से हृदय निर्मल होता है और निर्मल हृदय में प्रभु की प्रेरणा सुनाई पड़ती है ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमारे जीवन को प्रकाशमय बनाता है । अगले सूक्त में भी प्रस्तुत सूक्त की तरह सोम की महिमा का ही उल्लेख है-
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (इन्द्रपीतम्) विदुषामभ्यस्तम् (नृचक्षसम्) सर्वजनानां द्रष्टारम् (स्वर्विदम्) सर्वज्ञम् (त्वाम्) भवन्तं संसेव्य (प्रजाम् इषम्) सर्वविधसन्तानधनाद्यैश्वर्यं (भक्षीमहि) भजेमहि ॥९॥ इत्यष्टमं सूक्तमेकत्रिंशत्तमो वर्गश्च समाप्तः ॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - All-watching guardian of humanity, omniscient lord of bliss, adored and self-realised by the soul of humanity, we pray for the gift of food and energy, light and knowledge, and all round happiness for all people of the world, your children.