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पु॒ना॒नः क॒लशे॒ष्वा वस्त्रा॑ण्यरु॒षो हरि॑: । परि॒ गव्या॑न्यव्यत ॥
English Transliteration
Mantra Audio
punānaḥ kalaśeṣv ā vastrāṇy aruṣo hariḥ | pari gavyāny avyata ||
Pad Path
पु॒ना॒नः । क॒लशे॑षु । आ । वस्त्रा॑णि । अ॒रु॒षः । हरिः॑ । परि॑ । गव्या॑नि । अ॒व्य॒त॒ ॥ ९.८.६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:8» Mantra:6
| Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:31» Mantra:1
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:6
ARYAMUNI
Word-Meaning: - वह परमात्मा (वस्त्राणि, अरुषः) विद्युत् के समान तेजरूप वस्त्रों को धारण करता हुआ (आ) प्रत्येक वस्तु को अपने भीतर रखकर (कलशेषु) प्रत्येक ब्रह्माण्ड में आप व्यापक होकर (पुनानः) सबको पवित्र कर रहा है और (हरिः) सबके दुःखों को हरनेवाला (गव्यानि, पर्यव्यत) प्रत्येक पृथिव्यादि ब्रह्माण्डों का आच्छादन कर रहा है ॥६॥
Connotation: - परमात्मा इस संसार की उत्पत्ति, स्थिति तथा प्रलय का कारण है, इसलिये उसको हरि रूप से कथन किया है, वह परमात्मा विद्युत् के समान गतिशील होकर सबको चमत्कृत करता है। उसी की ज्योति को ज्ञानवृत्ति द्वारा उपलब्ध करके योगी आनन्दित होते हैं ॥६॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
अरुषः - हरिः
Word-Meaning: - [१] (कलशेषु) = ' कलाः शेरते एषु' सोलह कलाओं के आधारभूत इन शरीरों में व्याप्त होता हुआ यह सोम (पुनानः) = पवित्र करनेवाला है। यह (आ अरुषः) = आरोचमान है, ज्ञान को दीप्त करनेवाला है । (हरिः) = कष्टों व रोगों का हरण करनेवाला है। [२] इसके रक्षण के लिये (गव्यानि) = ज्ञान की वाणियों से बने हुए (वस्त्राणि) = वस्त्रों को परि (अव्यत) = समन्तात् धारण करनेवाले बनो [पर्याच्छादयति-अव्यति सा० ] । 'गव्य वस्त्रों को धारण' का भाव है 'निरन्तर ज्ञान प्राप्ति में लगना ' । यह ज्ञान का व्यसन ही अन्य व्यसनों से हमें बचाता है और तभी सोम के रक्षण का सम्भव होता है।
Connotation: - भावार्थ-रक्षित सोम हमें पवित्र बनाता है, हमारे ज्ञान को दीप्त करता है, हमारे कष्टों व रोगों का हरण करता है ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - स परमात्मा (वस्त्राणि, अरुषः) विद्युदिव तेजोमयवस्त्रं दधानः (आ) समस्तवस्तूनि आत्मनि निधाय (कलशेषु) प्रतिब्रह्माण्डं व्याप्य (पुनानः) जगत् पुनाति, तथा (हरिः) सर्वापद्धारकः (गव्यानि, पर्यव्यत) पृथिव्यादि- सर्वलोकानाच्छादयति ॥६॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Soma, lord of peace and purity, destroyer of suffering, manifests in refulgent forms of existence and pervades all round in stars and planets of the universe.
