Go To Mantra

गो॒जिन्न॒: सोमो॑ रथ॒जिद्धि॑रण्य॒जित्स्व॒र्जिद॒ब्जित्प॑वते सहस्र॒जित् । यं दे॒वास॑श्चक्रि॒रे पी॒तये॒ मदं॒ स्वादि॑ष्ठं द्र॒प्सम॑रु॒णं म॑यो॒भुव॑म् ॥

English Transliteration

gojin naḥ somo rathajid dhiraṇyajit svarjid abjit pavate sahasrajit | yaṁ devāsaś cakrire pītaye madaṁ svādiṣṭhaṁ drapsam aruṇam mayobhuvam ||

Mantra Audio
Pad Path

गो॒ऽजित् । नः॒ । सोमः॑ । र॒थ॒ऽजित् । हि॒र॒ण्य॒ऽजित् । स्वः॒ऽजित् । अ॒प्ऽजित् । प॒व॒ते॒ । स॒ह॒स्र॒ऽजित् । यम् । दे॒वासः॑ । च॒क्रि॒रे । पी॒तये॑ । मद॑म् । स्वादि॑ष्ठम् । द्र॒प्सम् । अ॒रु॒णम् । म॒यः॒ऽभुव॑म् ॥ ९.७८.४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:78» Mantra:4 | Ashtak:7» Adhyay:3» Varga:3» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:4» Mantra:4


Reads 309 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोमः) परमात्मा (गोजित्) सब प्रकार की सूक्ष्म शक्तियों को जीतनेवाला है। तथा (रथजित्) बड़े से बड़े वेगवाले पदार्थ को जीतनेवाला है और (हिरण्यजित्) बड़ी-बड़ी शोभाओं को जीतनेवाला है। तथा (स्वर्जित्) सब सुखों को जीतनेवाला है और (अब्जित्) बड़े-बड़े वेग को जीतनेवाला है। तथा (सहस्रजित्) अनन्त पदार्थों का जीतनेवाला है। (यम्) जिस (मदम्) आह्लादक (स्वादिष्ठम्) ब्रह्मानन्द देनेवाले (द्रप्सम्) रसस्वरूप (अरुणम्) प्रकाशस्वरूप (मयोभुवम्) सुख देनेवाले परमात्मा का (देवासः) विद्वद्गण (नः) हमारी (पीतये) तृप्ति के लिये (चक्रिरे) व्याख्यान करते हैं ॥४॥
Connotation: - परमात्मा के आगे इस संसार की सब शक्तियें तुच्छ हैं अर्थात् वह सर्वविजयी है। उसी से विद्वान् लोग नित्य सुख की प्रार्थना करते हैं ॥४॥
Reads 309 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सर्वविजयी सोम

Word-Meaning: - [१] (सोमः) = यह सोम [वीर्यशक्ति] (नः) = हमारे लिये (गोजित्) = इन्द्रियाँ का विजय करनेवाला है। इस सोम के रक्षण से सब इन्द्रियों की शक्ति बड़ी ठीक बनी रहती है । (रथजित्) = शरीर रूप रथ को यह जीतनेवाला है, सोमरक्षण ही शरीर को नीरोग बनाता है। (हिरण्यजित्) = यह सोम [हिरण्यं वै ज्योतिः ] ज्योति का विजय करनेवाला है। सुरक्षित सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनकर ज्ञान का वर्धन करता है। ज्ञानवर्धन के द्वारा यह (स्वर्जित्) = सुख का विजय करनेवाला है । अविद्या के कारण ही तो कष्ट थे। विद्या का प्रकाश हुआ और कष्ट गये। यह सोम (अब्जित्) = हमारे लिये कर्मों का विजय करनेवाला होकर पवते प्राप्त होता है, सोमरक्षण से प्राप्त शक्ति हमें क्रियाशील बनाती है । इस प्रकार क्रियाशीलता के द्वारा यह सोम (सहस्त्रजित्) = हजारों वस्तुओं का हमारे लिये विजय करनेवाला है । [२] यह सोम वह है (यम्) = जिसको (देवासः) = देववृत्ति के व्यक्ति (पीतये चक्रिरे) = शरीर के अन्दर ही पान के लिये करते हैं । (मदम्) = यह उल्लास का जनक है, (स्वादिष्ठम्) = हमारी वाणी में माधुर्य का अतिशयेन सञ्चार करनेवाला है, (द्रप्सम्) = [दृपी हर्षणे] हर्ष को उत्पन्न करता है अथवा [संभृतः प्सानीयो भवति नि० ५ । १४] शरीर में धारण किया हुआ भक्षणीय होता है, शरीर में ही व्याप्त करने योग्य होता है। (अरुणम्) = हमें तेजस्वी बनाता है और (मयोभुवम्) = नीरोगता को उत्पन्न करता है ।
Connotation: - भावार्थ- शरीर के अंग-प्रत्यंग को ठीक रखने व सब शक्तियों को स्थिर रखने का आधार सोम ही है। इसके धारण में ही जीवन है।
Reads 309 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोमः) परमेश्वरः (गोजित्) नानाविधसूक्ष्मातिसूक्ष्म- शक्तिजेतास्ति। तथा (रथजित्) महावेगवन्तमपि पदार्थं जयति। अथ च (हिरण्यजित्) महतीमपि शोभामभिभवति। तथा (स्वर्जित्) सकलसुख-विजयकर्तास्ति तथा (अब्जित्) महान्तमपि वेगं विजयते अथ च (सहस्रजित्) असङ्ख्यवस्तुविजेतास्ति। (यम्) इमम् (मदम्) आह्लादकं (स्वादिष्ठम्) ब्रह्मानन्दप्रदं (द्रप्सम्) रसस्वरूपं (अरुणम्) प्रकाशरूपं (मयोभुवम्) सुखदं परमात्मानं (देवासः) दिव्यगुणवन्तो विद्वज्जनाः (नः) अस्माकं (पीतये) तृप्तये (चक्रिरे) व्याख्यानं कुर्वते ॥४॥
Reads 309 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma, universal spirit of peace and bliss, is the creator master controller and giver of earthly and divine wealth and enlightenment, movement and progress, golden graces of beauty and excellence, happiness and fulfilment and fluid assets, it purifies us and wins us a thousand victories of existence. This spirit of universal joy, exciting, most delightful, streaming forth, enlightening, giver of peace and fulfilment, the divines reveal to us for our enlightenment and well being.