Go To Mantra

अध॑ श्वे॒तं क॒लशं॒ गोभि॑र॒क्तं कार्ष्म॒न्ना वा॒ज्य॑क्रमीत्सस॒वान् । आ हि॑न्विरे॒ मन॑सा देव॒यन्त॑: क॒क्षीव॑ते श॒तहि॑माय॒ गोना॑म् ॥

English Transliteration

adha śvetaṁ kalaśaṁ gobhir aktaṁ kārṣmann ā vājy akramīt sasavān | ā hinvire manasā devayantaḥ kakṣīvate śatahimāya gonām ||

Mantra Audio
Pad Path

अध॑ । श्वे॒तम् । क॒लश॑म् । गोभिः॑ । अ॒क्तम् । कार्ष्म॑न् । आ । वा॒जी । अ॒क्र॒मी॒त् । स॒स॒ऽवान् । आ । हि॒न्वि॒रे॒ । मन॑सा । दे॒व॒ऽयन्तः॑ । क॒क्षीव॑ते । श॒तऽहि॑माय । गोना॑म् ॥ ९.७४.८

Rigveda » Mandal:9» Sukta:74» Mantra:8 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:32» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:4» Mantra:8


Reads 334 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अध) जब (श्वेतं कलशम्) सत्त्वगुणविशिष्ट अन्तःकरण को (गोभिः) जो इन्द्रियवृत्तियों से (अक्तम्) राञ्जित है (कार्ष्मन्) जो अत्यन्त शुद्ध हो गया है, उसमें (वाजी) बलवान् परमात्मा (आक्रमीत्) अपनी दीप्ति द्वारा प्रविष्ट होता है। उस परमात्मा का (ससवान्) भजन करता हुआ (मनसा देवयन्तः) मन से प्रकाश करते हुए (गोनाम्) पृथिव्यादि लोक-लोकान्तरों के (शतहिमाय) सौ हेमन्तऋतुपर्यन्त अनन्त प्रकार के ऐश्वर्य को (कक्षीवते) विद्वान् के लिये (हिन्विरे) प्रेरणा करता है ॥८॥
Connotation: - जो पुरुष शुद्धि की पराकाष्ठा को पहुँच जाता है, परमात्मा उस पर अवश्यमेव दया करता है ॥८॥
Reads 334 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

कक्षीवान् शतहिम

Word-Meaning: - [१] (अध) = अब (गोभिः अक्तम्) = ज्ञान की वाणियों से प्रकाशित [ अलंकृत] (श्वेतं कलशम्) = शुद्ध, कलाओं के आधारभूत शरीर को (ससवान्) = सेवन करता हुआ [संभजन्] (वाजी) = यह शक्तिशाली सोम (कार्ष्मन्) = काष्ठा की ओर, लक्ष्य स्थान की ओर [सा काष्ठा सा परागतिः] (आ अक्रमीत्) = सर्वथा गतिवाला होता है। सोमरक्षण से शरीर शुद्ध होता है, ज्ञान से हम अलंकृत होते हैं और प्रभु की ओर चलते हैं। [२] (मनसा) = मन से (देवयन्तः) = उस देव [प्रभु] की कामना करते हुए लोग (आहिन्विरे) = इस सोम को अपने अन्दर समन्तात् प्रेरित करते हैं। यह शरीर में प्रेरित सोम की (कक्षीवते) = इस सोमरक्षण के लिये दृढ़ निश्चयी (शतहिमाय) = शतवर्षपर्यन्त गतिवाले [हि- गतौ ] पुरुष के लिये (गोनाम्) = ज्ञान की वाणियों को प्रेरित करता है ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम [क] शरीर को शुद्ध बनाता है, [ख] इसे ज्ञानालंकृत करता है,[ग] प्रभु रूप लक्ष्य की ओर ले चलता है।
Reads 334 times

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अध) यदा (श्वेतं कलशम्) सत्त्वगुणविशिष्टमन्तःकरणं (गोभिः) इन्द्रियवृत्तिभिः (अक्तम्) रञ्जितं तथा (कार्ष्मन्) अतिशुद्धं तस्मिन् (वाजी) बलवान् परमेश्वरः (आक्रमीत्) स्वदीप्त्या प्रविशति। तं परमात्मानं (ससवान्) सम्भजन् (मनसा देवयन्तः) मनसा प्रकाशयन् (गोनाम्) पृथिव्यादिलोकलोकान्तराणां (शतहिमाय) शतहिमर्तुपर्यन्तं नानाविधमैश्वर्यं (कक्षीवते) विदुषे (हिन्विरे) प्रेरयति ॥८॥
Reads 334 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Just as a well trained race horse shoots to the victory line, so does Soma, lord of light, life and peace, proceed to the pure heart of the devotee, a transparent receiver refined and consecrated by the holy voice of divinity. To him do celebrants of divinity with sincere mind enthusiastically pray to bless the scholars, the teacher and the disciple, with a hundred years of enlightened life of knowledge and wisdom.