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परा॒ व्य॑क्तो अरु॒षो दि॒वः क॒विर्वृषा॑ त्रिपृ॒ष्ठो अ॑नविष्ट॒ गा अ॒भि । स॒हस्र॑णीति॒र्यति॑: परा॒यती॑ रे॒भो न पू॒र्वीरु॒षसो॒ वि रा॑जति ॥

English Transliteration

parā vyakto aruṣo divaḥ kavir vṛṣā tripṛṣṭho anaviṣṭa gā abhi | sahasraṇītir yatiḥ parāyatī rebho na pūrvīr uṣaso vi rājati ||

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Pad Path

परा॑ । विऽअ॑क्तः । अ॒रु॒षः । दि॒वः । क॒विः । वृषा॑ । त्रि॒ऽपृ॒ष्ठः । अ॒न॒वि॒ष्ट॒ । गाः । अ॒भि । स॒हस्र॑ऽनीतिः । यतिः॑ । प॒रा॒ऽयतिः॑ । रे॒भः । न । पू॒र्वीः । उ॒षसः॑ । वि । रा॒ज॒ति॒ ॥ ९.७१.७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:71» Mantra:7 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:26» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:4» Mantra:7


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अरुषः) प्रकाशस्वरूप (वृषा) आनन्द का वर्षक (कविः) सर्वज्ञ (व्यक्तः) स्फुट परमात्मा (दिवः परा) द्युलोक से भी परे है। तथा (त्रिपृष्ठः) त्रिकालज्ञ परमात्मा (गाः) उपासनारूपी वाणी को (अभि) लक्ष्य करके (अन्विष्ट) स्थिर है और वह परमेश्वर (सहस्रणीतिः) अनन्त शक्तिवाला है और (यतिः) लोकमर्यादा का हेतु और (परायतिः) सर्वत्र व्याप्त है। परमात्मा (पूर्वी उषसः) अनादिकाल की उषाओं में (रेभो न) प्रकाशमान सूर्य के समान (विराजति) विराजमान है ॥७॥
Connotation: - अनादिकाल से परमात्मा अनेक उषःकालों को प्रकाशित करता हुआ सर्वत्र विद्यमान है ॥७॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यतिः परायतिः

Word-Meaning: - [१] सोम का रक्षण करनेवाला पुरुष (परा व्यक्तः) = पराविद्या [आत्मविद्या] से अलंकृत हुआ हुआ (अरुचः) = आरोचमान होता है । (दिवः कविः) = ज्ञान के द्वारा क्रान्तदर्शी बना हुआ, वस्तुतत्त्वों को देखनेवाला और अतएव उनमें न फँसनेवाला, (वृषा) = शक्तिशाली होता है। (त्रिपृष्ठः) = 'ऋग् यजु साम' रूप तीन आधारोंवाला (गाः अभि) = वेदवाणी रूप गौओं की ओर (अनविष्ट) = [ नव् गतौ] गतिवाला होता है। [२] (सहस्राणीतिः) = आनन्दमय प्रभु की ओर अपने को ले चलनेवाला, (यतिः) = संयमी, (परायतिः) = विषयों से दूर जानेवाला (रेभः न) = एक स्तोता के समान (पूर्वीः उषसः) = बहुत ही प्रात: प्रात: [ early in the morning] (विराजति) = अपने जीवन को व्यवस्थित करने में लगता है [regulates]। प्रातः काल उठकर अपने नित्य कृत्यों में प्रवृत्त हो जाता है।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षक पुरुष उत्कृष्ट ज्ञानवाला, विषयों में न फँसा हुआ, ज्ञान- प्रवण व संयमी होता है । यह बहुत ही उषाकाल में प्रबुद्ध होकर अपने नित्य कर्मों में प्रवृत्त हो जाता है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अरुषः) प्रकाशस्वरूपः (वृषा) आनन्दवर्षकः (कविः) सर्वज्ञः (व्यक्तः) स्फुटः परमात्मा (दिवः परा) द्युलोकादपि परोऽस्ति। तथा (त्रिपृष्ठः) त्रिकालज्ञः परमात्मा (गाः) उपासनारूपा वाणीः (अभि) अभिलक्ष्य (अन्विष्ट) स्थिरोऽस्ति। अथ स परमेश्वरः (सहस्रणीतिः) अनन्तशक्तिमानस्ति। तथा (यतिः) लोकमर्यादाहेतुरस्ति। तथा (परायतिः) सर्वत्र व्याप्तोऽस्ति। परमात्मा (पूर्वी उषसः) अनादिषूषस्सु (रेभो न) प्रकाशमानः सूर्य इव (विराजति) विराजमानोऽस्ति ॥७॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The divine Soma Spirit of peace and power self- refulgent beyond the lights of heaven, omniscient creator, omnificent giver, visionary and watchful over the three orders of time and space, delights in the songs of adoration as a committed listener. It is omnipotent guide over a thousand ways, immanent and transcendent, and rules and illuminates the eternal dawns of light and vision like the sun.