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प्र यु॒जो वा॒चो अ॑ग्रि॒यो वृषाव॑ चक्रद॒द्वने॑ । सद्मा॒भि स॒त्यो अ॑ध्व॒रः ॥
English Transliteration
Mantra Audio
pra yujo vāco agriyo vṛṣāva cakradad vane | sadmābhi satyo adhvaraḥ ||
Pad Path
प्र । यु॒जः । वा॒चः । अ॒ग्रि॒यः । वृषा॑ । अव॑ । च॒क्र॒द॒त् । वने॑ । सद्म॑ । अ॒भि । स॒त्यः । अ॒ध्व॒रः ॥ ९.७.३
Rigveda » Mandal:9» Sukta:7» Mantra:3
| Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:28» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:3
ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! आप (अध्वरः) “न ध्वरतीत्यध्वरः अध्वानं राति वा अध्वरः” हिंसावर्जित हैं और सत्य का रास्ता दिखलानेवाले हैं (सत्यः) सत्यस्वरूप हैं (वृषा) कामनाप्रद तथा (अग्रियः) सबसे अग्रणी और (प्रयुजः वाचः) उपयुक्तवाणी के बोलनेवाले हैं (वने सद्म अभि) याज्ञिक उपासनाओं में (अव चक्रदत्) उपास्य ठहराये जाते हैं ॥३॥
Connotation: - परमात्मा सत्यस्वरूप अर्थात् त्रिकालाबाध्य है, ऐसे सत्यादि पदों से उपनिषदों में “सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म” ये लक्षण किये गये हैं ॥३॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
सोमरक्षक का उत्कृष्ट जीवन
Word-Meaning: - [१] [युज्+क=युज] गत मन्त्र के अनुसार सोम का रक्षण करनेवाला पुरुष (वाचः प्रयुजः) = वाणी का प्रकृष्ट योग करनेवाला होता है, ज्ञान की वाणियों को अपने साथ जोड़ता है। ज्ञान को प्राप्त करके (अग्रियः) = मुख्य अग्र स्थान पर पहुँचनेवाला होता है। वृषा शक्तिशाली बनता है । (वने) = उपासना में [वन्= संभक्तौ] (अवचक्रदद्) = उस प्रभु का आह्वान करता है । [२] यह सोमरक्षक (सद्म अभि) = घर की ओर चलनेवाला होता है। यह जीवन को यात्रा समझता हुआ, यहाँ उलझ नहीं जाता । (सत्यः) = सदा सत्य को अपनानेवाला होता है। (अ-ध्वरः) = हिंसारहित यज्ञमय जीवनवाला बनता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षक - [क] ज्ञान की वाणियों को अपने साथ जोड़ता है, [ख] उन्नतिपथ पर आगे बढ़ता है, [ग] शक्तिशाली बनता है, [घ] उपासनामय जीवनवाला होता है, [ङ] जीवन को यात्रा समझता है, [च] सत्य को अपनाता है, [छ) यज्ञशील होता है ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! भवान् (अध्वरः) अहिंसकः सत्यवर्त्मनो दर्शकश्चास्ति (सत्यः) सत्यस्वरूपः (वृषा) अखिलकामवर्षणशीलः तथा (अग्रियः) सर्वाग्रणीः तथा (प्रयुजः वाचः) उपयुक्तवाचां प्रकाशकः अस्ति (वने सद्म अभि) याज्ञिकोपासनासु (अव चक्रदत्) संस्थाप्यते ॥३॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - First and foremost, generous and eternal lord Soma of love free from violence proclaims the words of truth relevant to yajnic life and calls up the devotees to the hall of yajna in peace and bliss.
