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पव॑मानास॒ इन्द॑वस्ति॒रः प॒वित्र॑मा॒शव॑: । इन्द्रं॒ यामे॑भिराशत ॥

English Transliteration

pavamānāsa indavas tiraḥ pavitram āśavaḥ | indraṁ yāmebhir āśata ||

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Pad Path

पव॑मानासः । इन्द॑वः । ति॒रः । प॒वित्र॑म् । आ॒शवः॑ । इन्द्र॑म् । यामे॑भिः । आ॒श॒त॒ ॥ ९.६७.७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:67» Mantra:7 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:14» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:7


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमानासः) पवित्र करनेवाला तथा (इन्दवः) सर्वैश्वर्यसंपन्न और (आशवः) व्यापक परमात्मा (यामेभिः) अपनी अनन्त शक्तियों से (तिरः) अज्ञानों का तिरस्कार करके (पवित्रम्) पवित्र (इन्द्रम्) कर्मयोगी को (आशत) प्राप्त होता है ॥७॥
Connotation: - जो पुरुष ज्ञानयोग वा कर्मयोग द्वारा अपने आपको ईश्वर के ज्ञान का पात्र बनाते हैं, उन्हें परमात्मा अपने अनन्त गुणों से प्राप्त होता है। अर्थात् वह परमात्मा के सच्चिदादि अनेक गुणों का लाभ करता है ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

पवमानास इन्दवः

Word-Meaning: - [१] (पवमानास:) = पवित्र करनेवाले ये (इन्दवः) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोमकण (पवित्रम्) = पवित्र हृदयवाले व्यक्ति को (तिरः) = तिरोहित रूप में (आशवः) = व्याप्त करनेवाले होते हैं । इस पुरुष के रुधिर में ये इस प्रकार व्याप्त होते हैं जैसे कि 'तिलेषु तैलं दध्नीव सर्पिः' । [२] ये सोमकण (इन्द्रम्) = जितेन्द्रिय पुरुष को (यामेभिः) = गतियों के द्वारा आशत प्राप्त होते हैं। सोमकणों को शरीर में ही व्याप्त रखने का सर्वोत्तम साधन यही है कि हम सदा क्रियाशील बने रहें ।
Connotation: - भावार्थ- सोमकण हमें पवित्र व शक्तिशाली बनाते हैं । क्रियाशीलता द्वारा हम इन्हें अपने में ही व्याप्त करें।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमानासः) पावकः (इन्दवः) सर्वैश्वर्यसम्पन्नः (आशवः) व्यापकः परमेश्वरः (यामेभिः) स्वकीयानन्तशक्तिभिः (तिरः) अज्ञानानि तिरस्कृत्य (पवित्रम्) पूतं (इन्द्रम्) कर्मयोगिनं (आशत) प्राप्नोति ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Pure and purifying, instant and vibrant, gifts of Soma, by their own potential of divinity, move and bless the pure heart and soul of the devotee.