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यत्ते॑ प॒वित्र॑मर्चि॒वदग्ने॒ तेन॑ पुनीहि नः । ब्र॒ह्म॒स॒वैः पु॑नीहि नः ॥

English Transliteration

yat te pavitram arcivad agne tena punīhi naḥ | brahmasavaiḥ punīhi naḥ ||

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Pad Path

यत् । ते॒ । प॒वित्र॑म् । अ॒र्चि॒ऽवत् । अग्ने॑ । तेन॑ । पु॒नी॒हि॒ । नः॒ । ब्र॒ह्म॒ऽस॒वैः । पु॒नी॒हि॒ । नः॒ ॥ ९.६७.२४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:67» Mantra:24 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:17» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:24


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! (ते) आपका (यत्) जो (पवित्रम्) पवित्र (अर्चिवत्) सूर्यादिकों में तेज है, (तेन) उससे (नः) हम लोगों को (पुनीहि) पवित्र करिए। तथा (ब्रह्मसवैः) अपने ब्रह्मभाव से (नः) हम लोगों को (पुनीहि) पवित्र करिए ॥२४॥
Connotation: - परमात्मा सूर्यादि सब दिव्य पदार्थों का प्रकाशक है और उसी के प्रकाश से प्रकाशित होकर सब तेजोमय प्रतीत होते हैं ॥२४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'ज्ञान व यज्ञों' द्वारा पवित्रता

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन् ! (यत्) = जो (ते) = तेरा (अर्चिवत्) = आकाश की ज्वालावाला अथवा 'अर्च पूजायाम्' पूजा की वृत्ति से युक्त (पवित्रम्) - जीवन को पवित्र बनानेवाला (ब्रह्म) = ज्ञान है, (तेन) = उस पवित्र ज्ञान से (नः) = हमें (पुनीहि) = पवित्र करिये। [२] हे अग्रे ! इस वेदज्ञान द्वारा उपदिष्ट (सवैः) = यज्ञों से (नः) = हमें (पुनीहि) = पवित्र करिये। वेदोपदिष्ट यज्ञों को करते हुए हम पवित्र - जीवनवाले बनें।
Connotation: - भावार्थ- ज्ञानेन्द्रियाँ ज्ञान को प्राप्त करें। कर्मेन्द्रियाँ ज्ञानपूर्वक किये जानेवाले यज्ञों में प्रवृत्त हों । इस प्रकार हमारा जीवन 'ज्ञान व यज्ञ' के द्वारा पवित्र हो जाये।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! (ते) तव (यत्) यत् (पवित्रम्) पूतं (अर्चिवत्) सूर्यादिषु तेजोऽस्ति (तेन) तेन तेजसा (नः) अस्मान् (पुनीहि) पवित्रय। तथा (ब्रह्मसवैः) स्वीयब्रह्मभावेन (नः) अस्मान्   (पुनीहि) पवित्रय ॥२४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, lord omniscient and self-refulgent, whatever power and purity there is in you and your radiations such as the sun and other stars, with that, pray, purify and sanctify us. Purify and illuminate us with the radiations of your grace.