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पव॑मान॒: सो अ॒द्य न॑: प॒वित्रे॑ण॒ विच॑र्षणिः । यः पो॒ता स पु॑नातु नः ॥

English Transliteration

pavamānaḥ so adya naḥ pavitreṇa vicarṣaṇiḥ | yaḥ potā sa punātu naḥ ||

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Pad Path

पव॑मानः । सः । अ॒द्य । नः॒ । प॒वित्रे॑ण । विऽच॑र्षणिः । यः । पो॒ता । सः । पु॒ना॒तु॒ । नः॒ ॥ ९.६७.२२

Rigveda » Mandal:9» Sukta:67» Mantra:22 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:17» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:22


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सः) वह परमात्मा (नः) हम लोगों को (पवमानः) पवित्र करनेवाला तथा (विचर्षणिः) सर्वदृष्टा है और (पवित्रेण) अपने पवित्र धर्मों से (यः) जो (पोता) सबको पवित्र करनेवाला है (सः) वह (नः) हमको (अद्य) अब (पुनातु) पवित्र करे ॥२२॥
Connotation: - इस मन्त्र में अपूर्वता का उपदेश किया गया है कि उपासनाकाल में उपासक अपनी पवित्रता का अनुसन्धान करे और उसकी न्यूनता देखकर उसकी याचना परमेश्वर से अवश्यमेव करे ॥२२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'पवित्रता का सम्पादक' सोम

Word-Meaning: - [१]( विचर्षणि:) = विशिष्ट द्रष्टा ज्ञानाग्नि को दीप्त करके हमें वस्तुतत्त्व का द्रष्टा बनानेवाला (सः) = वह सोम (अद्य) = आज (नः) = हमें (पवित्रेण) = पवित्र हृदय से (पवमानः) = पवित्र करनेवाला हो । पवित्र हृदय को प्राप्त कराके यह हमें पवित्र कर डाले । [२] वह सोम (यः) = जो (पोता) = हमें पवित्र करनेवाला है (सः) = वह (नः) = हमें पुनातु - पवित्र करे। सोम शरीर के रोगों को नष्ट करके शरीर शुद्धि का जनक होता है। काम, क्रोध, लोभ आदि को नष्ट करके मानस शुद्धि का कारण बनता है । बुद्धि की मन्दता को दूर करके बुद्धि को भी निर्मल कर डालता है।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमारे जीवन को रोग, क्रोध व बुद्धिमान्द्य आदि मलिनताओं से दूर करे।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सः) स परमात्मा (नः) अस्माकं (पवमानः) पवित्रयिता तथा (विचर्षणिः) सकलद्रष्टास्ति। अथ च (पवित्रेण) स्वकीयपवित्रधर्मेण (यः) य ईश्वरः (पोता) सकलपावकोऽस्ति (सः) असौ जगज्जनकः परमेश्वरः (नः) अस्मान् (अद्य पुनातु) अद्यैव पवित्रयतु ॥२२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The Soma that is pure and purifies us now with its sanctity and power, that all watching guardian and universal purifier may, we pray, purify and sanctify us right now.